July 28, 2026
National

अशोक गहलोत के कार्यकाल में 19 पेपर लीक हुए, तब राहुल गांधी क्यों रहे मौन: अविनाश गहलोत

19 papers were leaked during Ashok Gehlot’s tenure, why did Rahul Gandhi remain silent: Avinash Gehlot

राजस्थान के कैबिनेट मंत्री अविनाश गहलोत ने पेपर लीक के मुद्दे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर जुबानी हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अपने शासनकाल में हुए पेपर लीक मामलों पर कभी जवाबदेही नहीं दिखाई। उन्होंने दावा किया कि राजस्थान में जब अशोक गहलोत की सरकार थी, तब प्रदेश में पेपर लीक की 19 घटनाएं हुई थीं, लेकिन उस समय राहुल गांधी सहित कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने इस मुद्दे पर एक शब्द भी नहीं कहा।

अविनाश गहलोत ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री रहे धर्मेंद्र प्रधान एक गंभीर और जिम्मेदार नेता हैं, जिन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार में शिक्षा क्षेत्र में कई नवाचार किए। नई शिक्षा व्यवस्था में इतिहास से जुड़े कुछ विषयों में बदलाव किए गए, जिनका कांग्रेस ने विरोध किया, क्योंकि कांग्रेस सरकारों के समय पढ़ाए जाने वाले कुछ अध्यायों को हटाया गया।

उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने नैतिक जिम्मेदारी का परिचय देते हुए अपने पद से इस्तीफा दिया, ताकि छात्र-युवा वर्ग में गलत संदेश न जाए और यह स्पष्ट हो कि सरकार परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने और भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए गंभीर है। छात्र राजनीति से निकले वरिष्ठ नेता होने के नाते धर्मेंद्र प्रधान ने जवाबदेही का परिचय दिया, जिसका राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सांसदों ने भी स्वागत किया।

कैबिनेट मंत्री ने राहुल गांधी से सवाल करते हुए कहा कि जब राजस्थान में कांग्रेस सरकार के दौरान 19-19 पेपर लीक हुए, तब उन्होंने या कांग्रेस नेतृत्व ने इस मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी। जहां-जहां कांग्रेस की सरकारें रहीं, वहां पेपर लीक की घटनाएं सामने आईं, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने कभी जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की। गहलोत ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासनकाल में पेपर लीक के मामलों में न तो प्रभावी कार्रवाई हुई और न ही दोषियों के खिलाफ कठोर कदम उठाए गए। राहुल गांधी, सोनिया गांधी और कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेताओं की चुप्पी जनता के सामने कांग्रेस के दोहरे चरित्र को उजागर करती है।

अविनाश गहलोत ने कहा कि वर्तमान भाजपा सरकार ने परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने और पेपर लीक माफिया पर अंकुश लगाने के लिए सख्त कानून लागू किए हैं। सरकार की प्राथमिकता छात्रों के हितों की रक्षा करना और भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना है। भाजपा की कार्यशैली जवाबदेही पर आधारित है और यदि कहीं कोई गंभीर मामला सामने आता है तो पार्टी जिम्मेदारी लेने से पीछे नहीं हटती। राज्य सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और युवाओं का परीक्षा व्यवस्था पर भरोसा मजबूत बना रहे।

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