March 21, 2026
National

नौ साल में 242 करोड़ पौधे लगाए, उत्तर प्रदेश में बढ़ा वनाच्छादन और पौधरोपण अभियान: सीएम योगी

242 crore saplings planted in nine years, afforestation and plantation drive increased in Uttar Pradesh: CM Yogi

21 मार्च । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में अंतरराष्ट्रीय वन दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय वानिकी संवाद के उद्घाटन समारोह को संबोधित किया। इस दौरान उन्‍होंने कहा कि आज जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरण असंतुलन जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है, तब वनों का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। पिछले नौ वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश में वनाच्छादन को बढ़ाने में सफलता मिली है।

उन्‍होंने कहा कि हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में प्रकृति के साथ हुए खिलवाड़ के दुष्परिणामों को झेल रहा है। यह स्थिति हमें आत्म मंथन के लिए मजबूर करती है कि आखिर हमारे प्रयासों में कहां कमी रह गई। भारतीय वैदिक परंपरा में प्रकृति को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। हमारे ऋषियों ने हजारों वर्ष पहले ही यह संदेश दिया था कि धरती हमारी माता है और हम उसके पुत्र हैं—’माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः’। ऐसे में हर व्यक्ति का यह कर्तव्य है कि अपनी “मां” यानी धरती की रक्षा करे, उसके सम्मान और संरक्षण के लिए कार्य करे, और उसके साथ किसी प्रकार का खिलवाड़ न होने दे।

इस दौरान सीएम ने कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया तथा विभिन्न लोगों को सम्मानित किया। उन्होंने वन विभाग की प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की ऋषि परंपरा ने सदैव कहा है कि दशकूपसमा वापी, दशवापीसमो ह्रदः। दशह्रदसमः पुत्रो, दशपुत्रसमो द्रुमः॥’, जिसका अर्थ है कि 10 कुंओं के बराबर एक बावड़ी, 10 बावड़ियों के बराबर एक तालाब, 10 तालाबों के बराबर एक पुत्र और 10 पुत्रों के बराबर एक वृक्ष होता है। प्रकृति में वृक्ष की महत्ता सर्वोपरि मानी गई है। वन, जीवन के आधार और प्रकृति के संतुलन का भी एक महत्वपूर्ण आयाम प्रस्तुत करता है।

उन्‍होंने कहा कि यदि वन है तो जल है, जल है तो वन, वन है तो वायु और वायु है तो जीवन है। जीवन की कल्पना इसके बगैर नहीं की जा सकती। ऐसे में वैश्विक दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष की थीम ‘फॉरेस्ट एंड इकोनॉमिक्स’ रखी गयी है, जो यह दिखाती है कि हमें पारिस्थितिकी संतुलन को बनाए रखने, वनों से आर्थिक विकास और उससे मानव कल्याण के लिए कार्ययोजना प्रस्तुत करनी होगी।

सीएम योगी ने कहा कि मुझे प्रसन्नता है कि पिछले नौ वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश में वनाच्छादन को बढ़ाने में सफलता मिली है। सफलता तब मिली जब हमने इसे जन आंदोलन बनाया। जब भी कोई अभियान जन आंदोलन बनता है, तो सफलता प्राप्त होती है, क्योंकि तब उसका नेतृत्व समाज करता है, और सरकार और विभाग पीछे रहते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वन महोत्सव के अवसर पर पहले वर्ष कुल 5.5 करोड़ पौधरोपण हो पाए थे। इसमें भी निजी नर्सरी का सहारा लेना पड़ा था। वहीं गत वर्ष वन महोत्सव के अवसर पर 37 करोड़ पौधे एक ही दिन में प्रदेश भर में लगाए गए। इस दौरान हमारे पास 50 करोड़ पौधे मौजूद थे। इस वर्ष भी हमने 35 करोड़ का लक्ष्य रखा है, जो बढ़कर 40-45 करोड़ तक पहुंच सकता है। पिछले कुछ वर्षों से उत्तर प्रदेश इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगभग 2 लाख करोड़ का कैपिटल एक्सपेंडिचर सुनिश्चित कर रहा है। इसके बावजूद प्रदेश का वनाच्छादन बढ़ना एक सुखद अनुभूति कराता है।

उन्‍होंने कहा कि पिछले नौ वर्षों में 242 करोड़ पौधरोपण करने में सफलता प्राप्त की गई है और अब वनाच्छादन बढ़कर लगभग 10 फीसदी तक पहुंच चुका है। प्रदेश का वनाच्छादन उतना होना चाहिए जितनी देश की आबादी यूपी में रहती है। यानी इसे 16-17 फीसदी तक पहुंचाने के लिए काम करना होगा। वर्ष 2017 में हमारे पास केवल 1 रामसर साइट थी, आज इसकी संख्या बढ़कर 11 हुई है। हमारा प्रयास इसे 100 तक ले जाने का है। रामसर साइट टूरिज्म, वन्य जीवों, पक्षियों की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण साइट होती है। साथ ही वॉटर कंजर्वेशन की दृष्टि से भी इसकी भूमिका हो सकती है।

योगी ने कहा कि हम रामसर साइट घोषित करेंगे, तो वह स्थान भू-माफियाओं के कब्जे से मुक्त रहेगा और वहां पर आसानी से संरक्षण कार्यक्रम चलाए जा सकेंगे। इस दिशा में कई प्रयास हुए हैं, जिनमें अटल, एकलव्य, त्रिवेणी, ऑक्सी और स्मृति वन आदि शामिल हैं। गंगा, यमुना और सरयू नदियों के किनारे व्यापक पौधरोपण के कार्यक्रम चल रहे हैं। एक्सप्रेस-वे और राजमार्गों के दोनों किनारों पर बड़े पैमाने पर उपयुक्त प्रजाति के पौधों के रोपण कार्यक्रम को आगे बढ़ाया गया है। इसके लिए हर जिले में एक नदी के पुनरोद्धार का कार्य किया गया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है, जहां कार्बन फाइनेंस प्रोजेक्ट के तहत कार्बन क्रेडिट के लिए कृषकों को धनराशि वितरित की गई है। सरकार ने दुधवा नेशनल पार्क में इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। कनेक्टिविटी भी बेहतर की गई है। प्रदेश में वन आधारित 2,467 ग्रीन इकोनॉमी मॉडल उद्योग स्थापित किए गए हैं। हर व्यक्ति नेशनल पार्क में बाघ देखने जाता है। ऐसे में इनका संरक्षण हमारी जिम्मेदारी है। उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है, जहां मानव-वन्य जीव संघर्ष को आपदा की श्रेणी में रखा गया है।

सीएम ने कहा कि टाइगर कभी अचानक हमला नहीं करता। मेरा जन्म जहां हुआ था, उस घर से मुश्किल से 50 मीटर दूर से जंगल प्रारंभ हो जाता था। हम लोग टाइगर को देखते थे। कभी छेड़ते नहीं थे, उसने कभी हमें नुकसान नहीं पहुंचाया। हमारे पशुओं को कभी नुकसान नहीं पहुंचाया। वहीं, अगर हम टाइगर के साथ, उसकी सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करेंगे, तो स्वाभाविक रूप से वह हिंसक होगा।

उन्‍होंने कहा कि वन है तो बाघ है, बाघ है तो जैव विविधता है, और जीव सृष्टि है तो मानव सभ्यता है। ऐसे में वन संरक्षण केवल मानव सभ्यता के लिए नहीं बल्कि जीव सृष्टि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। जीव सृष्टि में ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ कृति मनुष्य है, तो हमारी नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि हम इसकी ओनरशिप लेते हुए वन संरक्षण के लिए हर स्तर पर प्रयास करें। हमने इस वर्ष भी वन विभाग के बजट को अच्छा खासा किया है। कुछ विभाग ऐसे रहते हैं, जहां पैसे के लिए हम कभी हाथ नहीं बांधते। जैसे सुरक्षा के मुद्दे पर, हम लोग जब आए थे तब से आज तक सुरक्षा के मुद्दे पर बजट को कई गुना बढ़ाया गया है।

उन्‍होंने कहा कि यहां कॉमन मैन की सुरक्षा के साथ कोई खिलवाड़ नहीं हो सकता। ऐसे ही फॉरेस्ट में भी सामाजिक वानिकी के लिए 800 करोड़ रुपये दिए गए हैं। वहीं गौशाला प्रबंधन के लिए 220 करोड़ और वन और वन आधुनिकीकरण के लिए 10 करोड़ दिए हैं।

रानीपुर टाइगर रिजर्व के संरक्षण के लिए 50 करोड़ का कॉर्पस फंड दिया गया है। क्लीन एयर मैनेजमेंट के लिए 194 करोड़ दिए गए हैं। वानिकी विश्वविद्यालय के लिए 50 करोड़ उपलब्ध कराए गए हैं। वर्ष 2017 से पहले गांगेय डॉल्फिन लगभग समाप्त हो गई थी। प्रधानमंत्री की प्रेरणा से आज देश में नमामि गंगे परियोजना के बाद गांगेय डॉल्फिन फिर से देखने को मिल रही हैं। पहले कुल डॉल्फिनों की संख्या 23 थी, आज 6,327 है। इसमें अकेले उत्तर प्रदेश में 2,397 डॉल्फिन हैं। इसी तरह गोरखपुर में जटायु संरक्षण केंद्र बनाया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में वर्तमान में सात सिटी में मेट्रो का संचालन किया जा रहा है। देश की पहली रैपिड रेल उत्तर प्रदेश में संचालित हो रही है। प्रदेश में 700 से अधिक इलेक्ट्रिक बसें उपलब्ध हैं। सर्वाधिक ई-रिक्शा भी उत्तर प्रदेश के पास मौजूद हैं। इतना ही नहीं, अयोध्या को सोलर सिटी के रूप में डेवलप करने का काम किया जा रहा है। इसके साथ ही 17 अन्य म्युनिसिपल कॉरपोरेशन को भी सोलर सिटी के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। सीएम ने कॉफी टेबल बुक के विमोचन पर कहा कि ये केवल विभाग तक सीमित न रहे। इसे हर मंत्री, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और सरकारी व निजी विश्वविद्यालयों को भी उपलब्ध करायी जाए क्योंकि इससे काफी रोचक जानकारियां मिलती हैं। कार्बन क्रेडिट के लिए किसानों से निरंतर संवाद होना चाहिए।

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