कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के ललित कला विभाग ने मंगलवार को विभाग की कला दीर्घा में अपनी 30वीं वार्षिक कला प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। प्रदर्शनी का औपचारिक उद्घाटन मुख्य अतिथि, कुलपति प्रोफेसर सोम नाथ सचदेवा ने किया।
सभा को संबोधित करते हुए प्रोफेसर सचदेवा ने समाज में कला की परिवर्तनकारी भूमिका पर जोर दिया और युवा कलाकारों से रचनात्मकता को सांस्कृतिक संवाद, सामाजिक परिवर्तन और व्यक्तिगत विकास के एक शक्तिशाली माध्यम के रूप में देखने का आग्रह किया। प्रदर्शित विषयों की विविधता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि कलाकृतियाँ भारत की सांस्कृतिक विरासत और समकालीन सामाजिक सरोकारों का एक गतिशील मिश्रण दर्शाती हैं।
अध्यक्ष डॉ. गुरचरण सिंह ने समग्र कला शिक्षा के प्रति विभाग की प्रतिबद्धता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वार्षिक प्रदर्शनी छात्रों को अपनी रचनात्मकता प्रदर्शित करने, आत्मविश्वास बढ़ाने और अपने कौशल को निखारने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करती है। प्रदर्शनी की संयोजक डॉ. मोनिका गुप्ता ने कहा कि प्रदर्शनी में छात्रों और शोधकर्ताओं द्वारा बनाई गई 300 से अधिक कलाकृतियां प्रदर्शित की गईं, जिनमें पारंपरिक लोक कला और लघु कला से लेकर अभिव्यक्तिवाद, डिजिटल प्रिंटमेकिंग और प्रायोगिक फोटोग्राफी जैसे समकालीन रूपों तक की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल है।
इस प्रदर्शनी में विविध माध्यमों में बनी पेंटिंग, स्केच, मूर्तियां, डिजिटल कला और वस्त्र-आधारित कृतियां शामिल हैं।यह प्रदर्शनी 20 मार्च तक जनता के लिए खुली रहेगी।


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