पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आतंकवाद के खिलाफ भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति वाले बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आतंकवादी घटनाओं को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए सुरक्षा व्यवस्था, सीमा पर लगे सीसीटीवी कैमरों, डेटा सुरक्षा और हथियारों में इस्तेमाल होने वाली तकनीक को लेकर भी कई सवाल उठाए।
प्रधानमंत्री मोदी ने ‘मन की बात’ में कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चल रहा है। इस पर सांसद पप्पू यादव ने पुलवामा और पहलगाम सहित आतंकवादी हमलों का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि 2014 के बाद देश में कई बड़े और छोटे-बड़े आतंकवादी हमले हुए हैं। सरकार को इन घटनाओं और देश की सुरक्षा व्यवस्था पर जवाब देना चाहिए। देश में आतंकवाद के खतरे के बीच यह भी देखना जरूरी है कि सुरक्षा से जुड़ी तकनीक और डेटा किसके नियंत्रण में है। उन्होंने सीमा पर लगे सीसीटीवी कैमरों में इस्तेमाल होने वाली चिप, बिजली व्यवस्था से जुड़े उपकरणों और राफेल लड़ाकू विमानों में इस्तेमाल होने वाली तकनीक को लेकर सवाल उठाए।
उन्होंने सवाल किया कि देश में लगे सीसीटीवी कैमरों और अन्य महत्वपूर्ण प्रणालियों में इस्तेमाल होने वाली चिप किस देश की है और इनसे जुड़ा डेटा कहां जा रहा है। उन्होंने राफेल का उदाहरण देते हुए कहा कि उसमें इस्तेमाल होने वाली तकनीक फ्रांस से जुड़ी है। पप्पू यादव ने आशंका जताई कि अगर महत्वपूर्ण तकनीकी प्रणालियों पर भारत का पूरा नियंत्रण नहीं है तो भविष्य में इसका सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।
उन्होंने इजरायल और ईरान से जुड़े उदाहरणों का जिक्र करते हुए कहा कि तकनीक और चिप के जरिए किसी देश की महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं को प्रभावित किया जा सकता है। भारत को इस तरह के संभावित खतरों को लेकर गंभीरता से विचार करना चाहिए। आतंकवाद के मुद्दे पर चीन और अमेरिका की भूमिका को लेकर सवाल उठाते हुए सांसद ने कहा कि पुलवामा और पहलगाम जैसी घटनाओं को केवल आतंकवाद के सामान्य मुद्दे से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। चीन और अमेरिका ने पाकिस्तान को महत्व दिया है और इससे भारत की स्थिति प्रभावित हुई है।
इंडिया ब्लॉक के दलों की 30 सितंबर को प्रस्तावित बैठक पर पप्पू यादव ने कहा कि राहुल गांधी को ऐसी बैठक जरूर करनी चाहिए और इसमें केवल मौजूदा महागठबंधन के दलों तक सीमित रहने के बजाय व्यापक स्तर पर अन्य लोगों और दलों को भी जोड़ने की जरूरत है। राहुल गांधी की भूमिका का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उनके लिए पद और प्रधानमंत्री की कुर्सी से ज्यादा देश, संविधान, लोकतंत्र और जनता महत्वपूर्ण हैं। 30 सितंबर को होने वाली बैठक महत्वपूर्ण है और विपक्ष को लोकतांत्रिक और संवैधानिक मुद्दों पर एकजुट होकर आगे बढ़ना चाहिए।
पप्पू यादव ने चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया और वोटर लिस्ट के मुद्दे पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बिहार, पश्चिम बंगाल और असम में बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। गरीब, कमजोर वर्गों, ईबीसी, ओबीसी, दलित और अल्पसंख्यकों के अधिकार प्रभावित हुए हैं। उन्होंने करीब 13 करोड़ लोगों के नाम काटे जाने का दावा करते हुए इसे संविधान और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़कर गंभीर आरोप लगाए। विपक्ष को इन मुद्दों पर एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए।
भाजपा और आरएसएस पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए उन्होंने इसे लोकतंत्र के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि जब तक ऐसे मामलों में कार्रवाई नहीं होती, तब तक विपक्ष को राहुल गांधी के नेतृत्व में लोकतांत्रिक अधिकारों और संविधान की रक्षा के लिए संघर्ष करते रहना चाहिए।

