मुख्य निर्वाचन अधिकारी ए श्रीनिवास ने बुधवार को सोशल मीडिया पर चल रहे विशेष गहन संशोधन (एसआईआर)-2026 के दौरान मतदाता सूची से मतदाताओं के नामों को बड़े पैमाने पर हटाए जाने के दावों को भ्रामक और निराधार बताते हुए खारिज कर दिया।
उन्होंने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में दर्ज हो और अपात्र व्यक्तियों का नाम शामिल न हो। 15 जून से 14 जुलाई तक चल रही मतगणना के दौरान बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) सभी मौजूदा मतदाताओं को मतगणना प्रपत्र वितरित कर रहे हैं। हस्ताक्षरित प्रपत्र जमा करने वालों को बिना किसी अतिरिक्त दस्तावेज के प्रारंभिक मतदाता सूची में शामिल कर लिया जाएगा।
श्रीनिवास ने स्पष्ट किया कि मतदाता का नाम केवल विशिष्ट मामलों में ही हटाने पर विचार किया जा सकता है, जिनमें दोहरा पंजीकरण, मृत्यु, स्थायी प्रवास, लापता मतदाता या जनगणना प्रपत्र पर हस्ताक्षर करने से इनकार करना शामिल है। ऐसी कोई भी कार्रवाई स्थानीय सत्यापन और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने के बाद ही की जाएगी।
उन्होंने कहा कि मतदाता परिवार के किसी वयस्क सदस्य के माध्यम से या ऑनलाइन भी फॉर्म जमा कर सकते हैं। 21 जुलाई से 20 अगस्त तक दावा और आपत्ति दर्ज करने की अवधि के दौरान, पात्र नागरिक फॉर्म-6 के माध्यम से अपना नाम दर्ज कराने या फॉर्म-8 के माध्यम से सुधार करवाने का अनुरोध कर सकते हैं।
1 जुलाई को दोपहर 2 बजे तक, हरियाणा भर में 95.09% जनगणना प्रपत्र वितरित किए जा चुके थे, जबकि 32.66% प्रपत्रों का डिजिटलीकरण हो चुका था। मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने नागरिकों से अफवाहों पर ध्यान न देने और समय सीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी करने का आग्रह किया।

