February 27, 2025
National

पुणे बस दुष्कर्म मामला : कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार बोले- ‘महाराष्ट्र में खत्म हो गई कानून-व्यवस्था’

Pune bus rape case: Congress leader Vijay Wadettiwar said- ‘Law and order has ended in Maharashtra’

महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम की एक बस के अंदर 26 साल की युवती के साथ दुष्कर्म के मामले पर राजनीति तेज हो गई है। महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विजय वडेट्टीवार ने पुणे के स्वारगेट डिपो स्टैंड पर हुई घटना की निंदा की। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में कानून-व्यवस्था खत्म हो गई है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विजय वडेट्टीवार ने गुरुवार को न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “पुणे के स्वारगेट डिपो में जिस तरह की घटना घटी है, उससे पुलिस पर सवाल उठता है। महाराष्ट्र में कानून-व्यवस्था की पूरी तरह से धज्जियां उड़ चुकी हैं। हमने ‘शक्ति कानून’ की मांग की थी और एक मसौदा भी तैयार किया था, जिसके बाद ‘शक्ति कानून’ को पास भी किया गया, ताकि महिलाओं की सुरक्षा के लिए उसे लागू किया जा सके, मगर वह नहीं हुआ।”

उन्होंने कहा, “मैं पूछना चाहता हूं कि पुलिस क्या कर रही है, क्योंकि रोजाना इस तरह की घटनाएं हो रही हैं। हाल ही में एमबीबीएस की युवती ने सुसाइड किया और हर साल दो दर्जन से अधिक लड़कियां सुसाइड करती हैं या फिर गायब हो जाती हैं या उनका मर्डर हो जाता है। महाराष्ट्र में इस तरह की घटना हो रही है और सत्ताधारी दल सत्ता में व्यस्त है। गृह मंत्री को इस तरफ ज्यादा ध्यान देना चाहिए। लेकिन, वह इस तरफ ध्यान नहीं दे रहे हैं। मुझे लगता है कि इस तरह की घटनाएं न हो, इसलिए ‘शक्ति’ कानून को लागू किया जाए। साथ ही जो भी आरोपी हैं, उस पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।”

विजय वडेट्टीवार ने महाराष्ट्र सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में सरकार की स्थिति तो ऐसी है कि कौन किस दिशा में है, पता नहीं है। मैं यही कहूंगा कि महाराष्ट्र में एक मुख्यमंत्री से काम नहीं चलेगा, कम से कम तीन मुख्यमंत्री बनाएंगे तो महाराष्ट्र ठीक से आगे बढ़ सकता है।

उन्होंने रामदास आठवले के राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के महाकुंभ में स्नान नहीं करने वाले बयान पर भी पलटवार किया। उन्होंने कहा, “रामदास आठवले हिंदू कब से बन गए हैं? क्या उन्होंने इस तरह की बातें करने के लिए बौद्ध धर्म से धर्मांतरण किया है? मुझे लगता है कि बाबा साहेब अंबेडकर के विचारों को छोड़कर वह जल्दी ही फकीर बनने के राह पर हैं, इसी कारण वह इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करते हैं।”

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