बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने चुनाव में पार्टी की हार का ठीकरा चुनाव आयोग और बीजेपी पर फोड़ा है। शुक्रवार को उन्होंने कहा कि अगर चुनाव आयोग समय रहते एनडीए द्वारा लोगों के खातों में पैसे डालकर वोट खरीदने की कोशिश को रोकता, तो कांग्रेस बड़े अंतर से जीत सकती थी।
आईएएनएस से बातचीत में कांग्रेस नेता राजेश राम ने कहा कि इस बार ऐसा लगा कि एनडीए ने पूरी तरह से मैनेजमेंट पर कब्जा कर लिया था और जनता के बीच पैसों का इस्तेमाल कर रहा था, जबकि कांग्रेस ने सिर्फ सामान्य कैंपेनिंग की।
राजेश राम ने बताया कि चुनाव आयोग ने कोड ऑफ कंडक्ट लगने के बावजूद कुछ पार्टियों को सीधे मदद पहुंचाई। चुनाव के दौरान लोगों के खातों में पैसों की एंट्री, स्कीम वर्कर और स्थानीय एजेंटों के जरिए लोगों तक संदेश पहुंचाना और चुनाव मैनेजमेंट, इस सब ने कांग्रेस के लिए मुश्किलें बढ़ा दी।
उन्होंने बताया कि कांग्रेस ने अपने गठबंधन के साथ भी पूरा तालमेल बनाने की कोशिश की, लेकिन चुनाव आयोग की मैपिंग के कारण अलग-अलग फेज और अलग-अलग क्षेत्रों में समन्वय करना मुश्किल था। उदाहरण के तौर पर हेलीकॉप्टर से एक से दूसरी जगह जाने में ढाई घंटे लग जाते थे, जिससे कैंपेनिंग प्रभावित हुई।
राजेश राम ने यह भी कहा कि कांग्रेस और इंडिया गठबंधन का वोट प्रतिशत स्थिर रहा। जनता का समर्थन वैसे ही था। जहां हमारी वोट प्रतिशत थी, वह उस प्रतिशत पर हम स्टैंड कर रहे हैं। रही बात पराजय की, तो पराजय का मुख्य कारण चुनाव आयोग की निष्पक्षता में कमी और एनडीए के पैसों के इस्तेमाल को रोकने में असफलता रही। उनका कहना है कि अगर चुनाव आयोग निष्पक्षता से काम करता, तो कांग्रेस आसानी से चुनाव जीत सकती थी।
उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस ने पूरी मेहनत और रणनीति से चुनाव लड़ा, लेकिन कुछ बाहरी परिस्थितियों ने जीत की राह मुश्किल बना दी।


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