पटियाला हाउस कोर्ट ने वायु प्रदूषण नियंत्रण की मांग को लेकर इंडिया गेट पर प्रदर्शन करने के मामले में नौ आरोपियों को जमानत दे दी है। कोर्ट ने इन सभी आरोपियों को 20-20 हजार रुपए के मुचलके पर जमानत दी है।
कोर्ट में सुनवाई के दौरान आरोपियों के वकील ने कहा कि उनका किसी भी प्रतिबंधित संगठन से कोई ताल्लुक नहीं है। पुलिस द्वारा लगाए गए सभी आरोप भ्रामक और झूठे हैं। केवल सरकार के खिलाफ नारेबाजी के लिए किसी को हिरासत में नहीं लिया जा सकता।
दरअसल, दिल्ली पुलिस ने 27 नवंबर को इंडिया गेट पर प्रदूषण के मुद्दे पर प्रदर्शन में बवाल को लेकर दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की थीं। इसके बाद संसद मार्ग थाना पुलिस ने सभी आरोपियों को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया था, जहां से 4 प्रदर्शनकारियों-गुरकीरत, रौजोत, क्रांति, और अविनाश को दो दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया था, जबकि अन्य 13 आरोपियों को एक दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।
13 आरोपियों की जमानत याचिका पर 28 नवंबर को सुनवाई होनी थी। कोर्ट ने इस पर दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा था।
पुलिस का कहना है कि यह प्रदर्शन सिर्फ प्रदूषण के मुद्दे पर नहीं था। भीड़ में कुछ लोग नक्सलवाद और आतंकवाद के समर्थन में नारेबाजी कर रहे थे। पुलिस के मुताबिक, जैसे ही उन्हें इंडिया गेट के पास सी-हेक्सागन इलाके से हटाया गया, वे सीधे संसद मार्ग थाने के बाहर पहुंच गए और प्रदर्शन शुरू कर दिया। हालत ये हो गई कि थाने का गेट और डीसीपी ऑफिस जाने वाला रास्ता पूरी तरह जाम हो गया। न कोई अंदर जा पा रहा था, न निकल पा रहा था।
पुलिस का कहना है कि जब भीड़ को हटाने की कोशिश की गई तो कई प्रदर्शनकारी आक्रामक हो गए। कुछ ने पुलिस पर धक्का-मुक्की की, तो कुछ खुद ही जमीन पर हाथ-पैर पटकने लगे। इससे कई प्रदर्शनकारियों को चोटें आईं। पुलिस के मुताबिक, जब उन्हें हिरासत में लेकर पहचान पूछी गई तो किसी ने सही जानकारी देने से इनकार कर दिया और उल्टा पुलिस कर्मचारियों पर ही गलत आरोप लगाने शुरू कर दिए।
दिल्ली पुलिस ने इस हंगामे में कुल 22 प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया। कर्तव्यपथ थाने में 6 प्रदर्शनकारियों पर केस हुआ, जबकि संसद मार्ग थाने में 17 प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।


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