राज्य विधि सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में, जवाली स्थित उप-मंडल विधि साक्षरता समिति ने शनिवार को भनई में एक विधि साक्षरता शिविर का आयोजन किया। शिविर की अध्यक्षता सिविल जज और उप-मंडल न्यायिक मजिस्ट्रेट शशि कांत ने की, जबकि नूरपुर के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश हितेंद्र शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे।
हितेंद्र ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि ऐसे शिविरों का उद्देश्य समाज को न्याय, कानूनी सहायता और नशामुक्त समाज, पर्यावरण संरक्षण एवं आपदा प्रबंधन जैसे सामाजिक सरोकारों के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने हेरोइन (चिट्टा) और चरस जैसी कृत्रिम दवाओं के बढ़ते प्रचलन पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि समाज में नशीली दवाओं का दुरुपयोग और तस्करी तेजी से बढ़ रही है और युवा इस खतरे का शिकार हो रहे हैं।
शर्मा ने कहा कि नूरपुर पुलिस जिला एक अंतरराज्यीय सीमावर्ती क्षेत्र है और इस क्षेत्र में अंतरराज्यीय मादक पदार्थों की तस्करी के नेटवर्क को खत्म करना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि नशामुक्त समाज की जिम्मेदारी सिर्फ पुलिस या स्वास्थ्य विभाग की नहीं है, बल्कि समाज के हर व्यक्ति को इसके खिलाफ सक्रिय भूमिका निभानी होगी। उन्होंने बताया कि नूरपुर पुलिस जिले में एनडीपीएस अधिनियम के तहत लगभग एक हजार मामले लंबित हैं, जो इस समस्या की गंभीरता को दर्शाता है।
इस शिविर में तीन प्रमुख विषयों पर प्रकाश डाला गया: नशामुक्त समाज का निर्माण, ग्रह के कल्याण के लिए पर्यावरणीय जिम्मेदारी को मजबूत करना और प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित परिवारों को सहायता प्रदान करना। मुख्य अतिथि ने इस बात पर जोर दिया कि पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी केवल सरकार पर नहीं छोड़ी जा सकती, बल्कि इसके लिए प्रत्येक नागरिक को दूरदर्शिता और जिम्मेदारी से कार्य करना होगा।
इस अवसर पर सिविल जज शशि कांत ने सभा में उपस्थित लोगों को उनके अधिकारों, कर्तव्यों और उपलब्ध निःशुल्क कानूनी सहायता योजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विधि सेवा प्राधिकरण समाज के जरूरतमंद और कमजोर वर्गों को निःशुल्क कानूनी सहायता प्रदान करता है। शिविर में स्कूली बच्चों द्वारा मादक पदार्थों के दुरुपयोग के खिलाफ भाषण और नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किए गए।


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