January 15, 2026
National

अध्यात्म कभी गरीब नहीं रहा, मुझे गुरु कृपा से मिला सब कुछ : सतुआ बाबा

Spirituality has never been poor, I got everything by the grace of my Guru: Satua Baba

आध्यात्मिक गुरु सतुआ बाबा ने प्रयागराज में आईएएनएस से बातचीत के दौरान अपने जीवन, आध्यात्मिक दृष्टि, सामाजिक सरोकारों और समकालीन राजनीति से जुड़े सवालों पर अपने विचार रखे।

महंगी गाड़ियों में चलने को लेकर पूछे गए सवाल पर सतुआ बाबा ने स्पष्ट कहा कि यह किसी प्रदर्शन का विषय नहीं है। उन्हें जो भी प्राप्त है, वह गुरु की कृपा, परंपरा का आशीर्वाद और ईश्वर की अनुकंपा का परिणाम है। उन्होंने कहा, “अध्यात्म कभी गरीब नहीं रहा। कृपा और साधना हमेशा आगे बढ़ाती है। गाड़ियों का मूल्य या ब्रांड महत्वपूर्ण नहीं है, महत्वपूर्ण यह है कि कर्तव्य तक पहुंचने के लिए जिस साधन की आवश्यकता हो, उसका उपयोग किया जाए। चाहे साधारण वाहन हो या कोई और, साधन सिर्फ साधन है।”

योगी आदित्यनाथ से निकटता के प्रश्न पर सतुआ बाबा ने इसे व्यक्तिगत संबंध नहीं, बल्कि गोरक्षपीठ और संत परंपरा से जुड़ा भावनात्मक रिश्ता बताया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश का संत समाज गोरक्षपीठ की परंपराओं से जुड़ा रहा है। उनके अनुसार, योगी आदित्यनाथ सभी प्राणियों और मनुष्यों से प्रेम करने वाले गुरु स्वरूप हैं और संत समाज उन्हें उसी रूप में मानता है।

अपने आसपास प्रभावशाली लोगों की मौजूदगी को लेकर सतुआ बाबा ने इसे किसी चमत्कार की बजाय सेवा और परोपकार की परंपरा से जोड़ा। उन्होंने गंगा का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे गंगा अनादि काल से परोपकार के लिए बहती है, वैसे ही जो सेवा के मार्ग पर चलता है, उसे सम्मान मिलता है। राम ने भारत को जोड़ा है, तोड़ा नहीं, और वही उनके आराध्य हैं।

राजनीतिक घटनाक्रम पर पूछे गए सवालों के जवाब में सतुआ बाबा ने संयमित लेकिन स्पष्ट रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि सभी विचारों का सम्मान होना चाहिए, लेकिन विकास प्राथमिक आवश्यकता है। उनका कहना था कि देश ऐसा होना चाहिए जहां कोई भूखा न सोए, हर व्यक्ति को भरपेट भोजन मिले, आवास हो और सुरक्षा सुनिश्चित हो। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और संतों-महर्षियों की परंपरा से जोड़ते हुए कहा कि यह देश उसी दिशा में आगे बढ़ रहा है।

विपक्षी नेताओं पर टिप्पणी करते हुए सतुआ बाबा ने तीखे शब्दों में कहा कि राम और रामभक्ति पर राजनीति करने वालों को आत्ममंथन करना चाहिए। अखिलेश यादव को सोचना चाहिए कि राम भक्तों पर गोलियां चलाने वाले इस भारत में राम पर बात करने के लिए उनके पास जगह नहीं बची है क्योंकि 500 वर्षों से राम को टेंट में बैठाया गया था और राजनैतिक रोटी सेकी थी। उनका पाप उनके परिवार पर चढ़ा है जो उनको निश्चित विनाश के ऊपर ले जाएगा।

सतुआ बाबा ने अपने आश्रम की परंपरा का जिक्र करते हुए कहा कि वहां अहंकार या स्वाभिमान नहीं, बल्कि प्रणाम की परंपरा है। जो भी आता है, वह ठाकुर जी को समर्पण और प्रणाम के भाव से आता है। इस परंपरा का उद्देश्य समाज के विचार, उत्थान और समरसता के लिए प्रार्थना करना है।

उन्होंने राम और कृष्ण के प्रसंगों का जिक्र करते हुए कहा कि धर्म का कार्य सत्य की स्थापना और असत्य का नाश है। राम ने समाज को जोड़ने के लिए धनुष तोड़ा और कृष्ण ने भी बाल्यावस्था से ही समाजहित में कर्म किए। उनके अनुसार, भारतीय परंपरा अच्छाइयों के पक्ष में खड़े होने की शिक्षा देती है, न कि बुराइयों के नशे की।

सतुआ बाबा ने कहा कि देश में घर-घर चूल्हा जले, हर व्यक्ति सुरक्षित महसूस करे और समाज आगे बढ़े, यही संत समाज की कामना है। उन्होंने भरोसा जताया कि देश और प्रदेश के नेतृत्व ने जनता को यह विश्वास दिया है और आने वाले समय में यह विश्वास और मजबूत होगा।

Leave feedback about this

  • Service