January 17, 2026
National

ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अल-फलाह समूह के चेयरमैन के खिलाफ दायर किया चार्जशीट

ED files chargesheet against Al-Falah Group chairman in money laundering case

विवादित अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट/अल-फलाह यूनिवर्सिटी अब मनी लॉन्ड्रिंग जांच के दायरे में आ गया है। ईडी ने 139.97 करोड़ रुपए की जमीन जब्त कर दी है। साथ ही, इसके जेल में बंद अध्यक्ष जवाद अहमद सिद्दीकी और अन्य के खिलाफ विशेष अदालत (पीएमएलए) में आरोपपत्र दाखिल किया है।
एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि अब तक, अपराध से हासिल रकम 493.24 करोड़ रुपए आंकी गई है।

जब से आतंकवाद विरोधी एजेंसियों ने इस संस्थान में काम करने वाले डॉक्टरों से जुड़े एक मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है, तब से यूनिवर्सिटी विवादों में घिरी हुई है। यूनिवर्सिटी में काम करने वाले डॉक्टरों में से एक कथित तौर पर 10 नवंबर को लाल किले के पास हुए कार विस्फोट में शामिल था। ईडी मुख्यालय ने अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट/अल-फलाह यूनिवर्सिटी और संबंधित संस्थानों/इकाइयों के संबंध में मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम, 2002 के तहत सक्षम पीएमएलए कोर्ट में जवाद अहमद सिद्दीकी और अन्य के खिलाफ चार्जशीट दायर की है।

ईडी ने बताया कि सिद्दीकी को पीएमएलए, 2002 की धारा 19 के तहत 18 नवंबर, 2025 को गिरफ्तार किया गया था और वह न्यायिक हिरासत में है। ईडी ने कहा कि इस मामले में, लगभग 54 एकड़ जमीन और उस पर बने निर्माण के रूप में 139.97 करोड़ रुपए (लगभग) की अचल संपत्ति कुर्क की गई है।

ईडी की जांच दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर संख्या 337 और 338, दिनांक 13 नवंबर, 2025 और एफआईआर संख्या 0021, दिनांक 10 जनवरी, 2026 पर आधारित है। ईडी ने कहा कि सिद्दीकी का अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट, अल-फलाह यूनिवर्सिटी (जिसमें अल-फलाह स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर शामिल है) और संबंधित संस्थाओं पर पूरा नियंत्रण था और वह गैरकानूनी कमाई का मुख्य लाभार्थी है।

मैनेजिंग ट्रस्टी और चांसलर के तौर पर, वह अन्य पदाधिकारियों के नाममात्र/प्रॉक्सी व्यक्तियों के रूप में काम करने के साथ, पूरा प्रशासनिक, वित्तीय और परिचालन नियंत्रण रखता था। वह मेडिकल कॉलेज के कामकाज के लिए भी जिम्मेदार थे, जिसमें एनएमसीई के नियमों का उल्लंघन और गलत जानकारी देकर और जरूरी तथ्यों को छिपाकर मंजूरी/सर्टिफिकेशन हासिल करना शामिल था।

ईडी ने बताया कि सिद्दीकी ने परिवार द्वारा नियंत्रित संस्थाओं के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग की थी। संस्थागत फंड परिवार के स्वामित्व वाली संस्थाओं (आमला एंटरप्राइजेज एलएलपी, करकुन कंस्ट्रक्शन एंड डेवलपर्स, दियाला कंस्ट्रक्शन एंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड) के जरिए भेजे गए थे। जांचकर्ताओं को विदेशी लेनदेन और विदेश में फंड की हेराफेरी भी मिली। ईडी ने बताया कि उनकी पत्नी के नाम पर 3 करोड़ रुपए से ज्यादा और उनके बेटे के नाम पर लगभग 1 करोड़ रुपए के विदेशी लेनदेन पाए गए।

जांच में पाया गया कि चैरिटेबल/शैक्षणिक संस्थानों का इस्तेमाल व्यक्तिगत/पारिवारिक/व्यावसायिक लाभ के लिए किया गया था

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