प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बीएमएस एजुकेशनल ट्रस्ट से जुड़े एक बड़े सीट ब्लॉकिंग स्कैम और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई की है। ईडी के बेंगलुरु जोनल ऑफिस ने 21 जनवरी 2026 को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत ट्रस्ट के ट्रस्टियों से संबंधित तीन अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच कर दिया है।
अटैच संपत्तियों में एक प्लॉट और दो फ्लैट शामिल हैं, जिनकी अनुमानित मार्केट वैल्यू 19.46 करोड़ रुपए है। यह कार्रवाई कर्नाटक एग्जामिनेशन अथॉरिटी के माध्यम से इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन के दौरान होने वाले सीट ब्लॉकिंग घोटाले और निर्धारित फीस से अधिक कैश वसूली के आरोपों पर आधारित है। मामला मल्लेश्वरम पुलिस और हनुमंतनगर पुलिस, बेंगलुरु द्वारा दर्ज एफआईआर पर ईडी ने जांच शुरू की थी।
ईडी ने इससे पहले 25 जून 2025 और 26 मई 2025 को ट्रस्ट से जुड़े ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाए थे। इन तलाशियों में खुलासा हुआ कि बीएमएस एजुकेशनल ट्रस्ट द्वारा संचालित इंजीनियरिंग कॉलेजों (जैसे बीएमएस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग) में एडमिशन प्रक्रिया के दौरान तय फीस से कहीं अधिक बिना हिसाब-किताब के कैश इकट्ठा किया जा रहा था।
जांच में पाया गया कि कॉलेज मैनेजमेंट सीटों को बिचौलियों और एजेंटों के माध्यम से बेच रहा था। ये एजेंट शिक्षा परामर्शदाता के रूप में काम करते थे। छात्रों से सीधे या एजेंटों के जरिए कैश लिया जाता था, लेकिन यह राशि ट्रस्ट के आधिकारिक खातों या किताबों में दर्ज नहीं की जाती थी। तलाशी के दौरान ट्रस्टियों, मैनेजमेंट और एजेंटों के ठिकानों से 1.86 करोड़ रुपए नकद जब्त किए गए। साथ ही, इंजीनियरिंग सीटों की बिक्री से जुड़े 20.20 करोड़ रुपए के अनहिसाब कैश कलेक्शन के सबूत भी बरामद हुए।
ये सबूत डायरी नोटिंग्स, व्हाट्सएप चैट्स, अन्य दस्तावेज आदि थे, जिनकी पुष्टि कॉलेज स्टाफ, मैनेजमेंट कर्मियों और शामिल एजेंटों ने की है। जांच से पता चला है कि सीट बिक्री से आए इस अनहिसाब कैश का इस्तेमाल बीएमएस एजुकेशनल ट्रस्ट के ट्रस्टियों के निजी फायदे और लाभ के लिए किया गया था। ईडी का कहना है कि यह मामला शिक्षा क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग का गंभीर उदाहरण है, जहां मैनेजमेंट कोटा के नाम पर सीटें कैश में बेची जा रही थीं। इससे माता-पिता और छात्रों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ योग्य उम्मीदवारों को अवसर से वंचित होना पड़ रहा था।
प्रवर्तन निदेशालय ने आगे की जांच जारी रखी है और मामले में शामिल अन्य व्यक्तियों व संपत्तियों की पहचान करने का प्रयास कर रहा है। यह कार्रवाई शिक्षा संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।


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