January 27, 2026
National

उत्तराखंड: यूसीसी के एक साल होने पर बोले मनु गौड़- मेरे लिए खुशी की बात, मुझे भी योगदान देने का मौका मिला

Uttarakhand: On the completion of one year of UCC, Manu Gaur said – It is a matter of happiness for me, I also got a chance to contribute.

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लागू हुए एक साल पूरे हो चुके हैं। इस खास मौके पर राज्य में यूसीसी को लागू करने के लिए बनाई गई ड्राफ्ट समिति के सदस्य मनु गौड़ ने कहा कि यह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रयासों का ही नतीजा है कि आज प्रदेश में यूसीसी को लागू हुए एक साल पूरे हो चुके हैं।

मनु गौड़ ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खुद यह बीड़ा उठाया था कि यूसीसी लागू करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य बने। यह मेरे लिए गर्व की बात है कि यूसीसी ड्राफ्ट करने के लिए जो समिति बनाई गई थी, उसमें मुझे भी काम करने का मौका मिला। इस ऐतिहासिक काम में मुझे भी योगदान देने का मौका मिला।

उन्होंने कहा कि यूसीसी को बनाने में तीन वर्ष का समय लगा। इसका मुख्य लक्ष्य यह था कि कैसे राज्य की शेष 50 प्रतिशत महिलाओं को पुरुष की तरह समानता का अधिकार प्राप्त हो सके। चाहे वो विवाह से संबंधित मसले हों या संपत्ति से संबंधित। आज से एक साल पहले 27 जनवरी 2025 को राज्य में यूसीसी लागू हुआ था। मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि यूसीसी पोर्टल पर अब तक चार लाख विवाह पंजीकृत हो चुके हैं। अब तक 80 लाख विवाह ऐसे पंजीकृत हुए हैं, जिनका विवाह यूसीसी लागू होने से पहले हुआ था। हालांकि, उन्होंने पहले इसे किसी और एक्ट में लागू करा रखा था। इससे आप सहज ही यूसीसी की लोकप्रियता का अनुमान लगा सकते हैं। वहीं, चार हजार से अधिक वसीयत भी पंजीकृत हो चुकी हैं। यूसीसी लागू होने से पहले इस तरह से आंकड़े प्रकाश में नहीं आ पाते थे।

उन्होंने कहा कि कुछ लोग इसमें आलोचनात्मक तथ्य निकालते हुए कहते हैं कि यह सिर्फ विवाह से संबंधित प्रकरण बनकर रह चुका है। ऐसे लोगों से मैं कहना चाहूंगा कि गत वर्ष 11 मुकदमे ऐसे दर्ज हुए हैं, जो बहुविवाह से संबंधित हैं। कई ऐसे विवाहित लोग थे, जो दूसरी शादी कर रहे थे, लिहाजा ऐसे लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए थे। इसके अलावा, 54 मामले तीन तलाक से जुड़े दर्ज किए गए थे। इस तरह से 54 महिलाओं का शोषण करने से रोका गया है, जिन्हें तीन तलाक का सहारा लेकर प्रताड़ित करने की कोशिश की जा रही थी। यह सभी आंकड़े जनता के बीच में सार्वजनिक नहीं हो पाते हैं।

उन्होंने कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप की बहुत चर्चा हुई। ऐसे मुद्दों का सहारा लेकर यह नेरेटिव स्थापित किया गया कि हम इस राज्य में धर्म के विरोध में काम करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि यूसीसी समिति और सरकार का उद्देश्य था कि लिव-इन रिलेशनशिप में अगर कोई माता-पिता बन जाए, तो उसके हितों का संरक्षण कैसे किया जाए? इसी को देखते हुए यूसीसी पोर्टल पर 162 एप्लिकेशन ‘लिव-इन’ को पंजीकृत करने के लिए फाइल की गई थी। जिसमें से 70 लोगों का लिव-इन पंजीकृत कर दिया गया, जबकि बाकियों का नहीं किया गया। बाकी लोगों की एप्लिकेशन रिजेक्ट कर दी गई। इसके पीछे कई कारण थे, क्योंकि ये लोग नियमों की शर्तों का पालन नहीं कर रहे थे। अब अगर इन्हें पंजीकृत नहीं किया गया, तो ऐसे मामले प्रकाश में नहीं आते और आगे चलकर अपराध की आशंका बढ़ जाती। ‘

साथ ही, उन्होंने यूसीसी में हुए संशोधन को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जिस तरह से भारत के संविधान में समय-समय पर संशोधन हुए थे, ठीक उसी प्रकार से यूसीसी को धरातल पर उतारने के लिए कई तरह के बदलाव की आवश्यकता महसूस हुई, जिसके बाद इसमें संशोधन किए गए, ताकि इसे पूरी तरह से प्रदेश की जनता के लिए जनपयोगी बनाया जाए। जब विवाह से संबंधित कानून बनाए गए थे, तब क्या किसी ने सोचा था कि हमें लिव इन पर भी कानून बनाना होगा। लेकिन, उत्तराखंड विश्व का पहला ऐसा राज्य बना, जहां पर लिव इन से संबंधित कानून बनाए गए। अगर भविष्य में हमें हो रहे बदलावों के संबंध में कानून बनाने की आवश्यकता पड़ती है, तो हम बनाएंगे।

मनु गौड़ ने कहा कि अब तक राज्य में लिव इन से संबंधित कितने मामले दर्ज हुए, उसके आंकड़े किसी के पास नहीं है, लिहाजा मैं आपको इसके बारे में नहीं बता सकता हूं। जहां तक प्राइवेसी की बात है, तो मैं स्पष्ट कर दूं कि कोई भी अधिकारी आपको इस संबंध में कोई भी जानकारी नहीं दे सकता है कि अब तक लिव इन के संबंध में कितने आंकड़े दर्ज हुए हैं।

इसके अलावा, उन्होंने प्राइवेसी को लेकर भी स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा कि विवाह भी एक व्यक्तिगत विषय है। मैं किससे विवाह कर रहा हूं? कब कर रहा हूं? कहां कर रहा हूं? लेकिन, भारत के उच्चतम न्यायालय ने सभी सरकारों को यह आदेश पारित किया है कि सभी राज्य सरकारें अपने यहां विवाह को पंजीकृत करने के संबंध में अनिवार्य रूप से कानून लेकर आए। यूसीसी के संबंध में भी हम विवाह को पंजीकृत करा रहे हैं, जिसके तहत पूरी जानकारी दर्ज होती है, तो इस तरह से देखे, तो विवाह भी राइट टू प्राइवेसी से ही जुड़ा मामला है। लिव इन का कानून महिलाओं को संरक्षण प्रदान करता है।

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