February 2, 2026
Entertainment

‘मर्दानी 3’ को लेकर बोलीं मल्लिका प्रसाद, ‘समाज खुद अपने दुश्मन गढ़ता है, अम्मा उसी सिस्टम की देन है’

Mallika Prasad on ‘Mardaani 3’: ‘Society creates its own enemies, Amma is a product of that system’

बॉक्स ऑफिस पर इन दिनों ‘मर्दानी 3’ का बोलबाला है; फिल्म को लोग काफी पसंद कर रहे हैं। ‘मर्दानी’ फ्रेंचाइजी ने हमेशा ऐसे मुद्दों को छुआ है जिन पर आमतौर पर लोग बात करने से कतराते हैं। इसी कड़ी में ‘मर्दानी 3’ में खलनायिका ‘अम्मा’ का किरदार निभाने वाली अभिनेत्री मल्लिका प्रसाद ने अपनी राय साझा की। आईएएनएस को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि हमारा समाज खुद अपने दुश्मन गढ़ता है। इसके अलावा, उन्होंने अपने किरदार के बारे में भी खुलकर बात की।

मल्लिका प्रसाद ने अपने किरदार को लेकर कहा, ”अम्मा को सिर्फ बुरा समझना आसान है, लेकिन उसे समझना थोड़ा मुश्किल है। अम्मा अकेले में पैदा हुई कोई शैतानी ताकत नहीं है, बल्कि वह उस समाज का नतीजा है, जहां लगातार अन्याय, भ्रष्टाचार और शोषण देखने को मिलता है। जब किसी इंसान से बार-बार उसका हक छीना जाता है और उसे न्याय नहीं मिलता, तो वही सिस्टम धीरे-धीरे उसे कठोर और खतरनाक बना देता है। अम्मा भी उसी सिस्टम के भीतर रहकर काम कर रही है, जिसने कभी उसके साथ इंसाफ नहीं किया।”

मल्लिका ने कहा, ”यह बात थोड़ी डराने वाली जरूर है, लेकिन सच्चाई यही है कि हमारा समाज खुद अपने दुश्मन तैयार करता है। रोजमर्रा की छोटी-छोटी नाइंसाफी, लोगों की अनदेखी और सिस्टम की नाकामी मिलकर ऐसे किरदारों को जन्म देती हैं। अम्मा उसी टूटे हुए भरोसे और छीने गए इंसाफ का चेहरा है। मेरा किरदार सिर्फ एक खलनायक नहीं, बल्कि समाज की देन है। यही वजह है कि मैंने इस किरदार को निभाते वक्त उसे सिर्फ एक निगेटिव कैरेक्टर की तरह नहीं देखा, बल्कि एक इंसान के तौर पर समझने की कोशिश की।”

उन्होंने कहा, ”बड़े और प्रभावशाली खलनायक हमेशा दर्शकों को याद रहते हैं। ‘मोगैंबो’ और ‘गब्बर सिंह’ जैसे किरदार आज भी लोगों के जेहन में बसे हुए हैं। ऐसे विलेन इसलिए यादगार बनते हैं क्योंकि वे सिर्फ डराते नहीं, बल्कि कहानी को एक मजबूत दिशा भी देते हैं।”

मल्लिका ने कहा, ”जब एक महिला विलेन को पर्दे पर उतारा जाता है, तो जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। खलनायिका को सिर्फ गुस्से या दिखावे तक सीमित नहीं रखा जा सकता। उसमें भावनाएं, दर्द और इंसानियत के छोटे-छोटे पल दिखाना भी जरूरी होता है। यही चीज किरदारों को असली और असरदार बनाती है। विलेन में इंसानियत तलाशना सबसे मुश्किल लेकिन सबसे जरूरी काम होता है।”

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