February 2, 2026
National

एनसीपी विलय की चर्चा पर बोले राम कदम, अजित दादा के निधन के बाद ही क्यों उठीं ये बातें?

Ram Kadam spoke on the discussion of NCP merger, why did these issues arise only after the death of Ajit Dada?

महाराष्ट्र की राजनीति से लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों तक भाजपा विधायक राम कदम ने कई विषयों पर प्रतिक्रिया दी। राम कदम ने एनसीपी के संभावित विलय पर कहा कि जब तक अजित दादा जीवित थे, तब तक शरद पवार गुट और अजित पवार गुट के एक होने की कोई चर्चा नहीं थी।

उन्होंने सवाल उठाया कि यह सारी बातें अजित दादा के निधन के बाद ही क्यों शुरू हुईं। पहले कभी शरद पवार या अन्य नेताओं ने इस तरह की कोई बात नहीं कही। अब अचानक इस मुद्दे को उठाया जा रहा है, जिससे आम लोगों के मन में यह सवाल पैदा होता है कि कहीं यह नई ‘घिनौनी राजनीति’ की शुरुआत तो नहीं है।

उन्होंने कहा कि अगर अजित पवार और उनका दल सरकार का हिस्सा हैं और कोई बड़ा फैसला लेना चाहते हैं तो नैतिकता के आधार पर सबसे पहले मुख्यमंत्री से बात होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि खुद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी स्पष्ट कर चुके हैं कि इस तरह की कोई बातचीत नहीं हुई है। इससे यह साफ होता है कि अजित पवार के निधन के बाद उठी ये बातें सिर्फ मनगढ़ंत कहानियां हैं।

राम कदम ने भारत-पाकिस्तान क्रिकेट संबंधों पर बोलते हुए कहा कि भारत के खिलाड़ी पहले भी मैदान में पाकिस्तान को जवाब दे चुके हैं। उन्होंने कहा कि चाहे खेल का मैदान हो, जमीन हो या आसमान, भारत ने हर जगह पाकिस्तान को सबक सिखाया है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बदला हुआ भारत है, जो दुश्मन के घर में घुसकर भी जवाब देने की ताकत रखता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान के साथ खेलना है या नहीं, इसका फैसला सरकार, खेल मंत्रालय और बीसीसीआई करेगा, लेकिन उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान की सरकार और वहां के खिलाड़ियों के मन में आज भी बदले हुए भारत का डर मौजूद है।

उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि जब से मतदाता सूची में पारदर्शिता लाने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया शुरू हुई है, तब से उन्हें मिर्ची लगी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई राज्यों में 50 लाख से लेकर 90 लाख तक फर्जी नाम मतदाता सूची में जोड़े गए थे, जिन्हें चुनाव आयोग ने हटा दिया है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और नेता के तौर पर ममता बनर्जी का दायित्व बनता है कि वह इस प्रक्रिया का स्वागत करें, लेकिन उनका विरोध इसलिए है क्योंकि अगर बांग्लादेशी घुसपैठियों के नाम हटे तो उनका वोट बैंक कमजोर हो जाएगा और उनकी कुर्सी डगमगा सकती है। उन्होंने कहा कि यह सब राजनीति लोकहित में नहीं, बल्कि सत्ता बचाने के लिए की जा रही है।

राम कदम ने देश के केंद्रीय बजट पर बोलते हुए कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया गया बजट न सिर्फ देश के भीतर, बल्कि देश के बाहर भी उद्योग जगत और अन्य देशों की सरकारों द्वारा सराहा गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत में विपक्ष की प्रतिक्रिया हर साल एक जैसी होती है।

उन्होंने कहा कि 2014 से लेकर 2026 तक हर बजट के बाद राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे की प्रतिक्रियाओं में एक शब्द तक का फर्क नहीं होता। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि शायद कांग्रेस को अपना ‘स्क्रिप्ट राइटर’ बदलना चाहिए, क्योंकि हर साल वही बातें दोहराई जाती हैं।

राम कदम ने कहा कि विपक्ष के पास सच्चाई स्वीकार करने का मन नहीं है। न तो मल्लिकार्जुन खड़गे और न ही राहुल गांधी में यह साहस है कि वे देश की प्रगति को स्वीकार करें।

उन्होंने एनसीपी के भीतर सुनेत्रा पवार के नाम को लेकर उठे विवाद पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह फैसला अजित पवार गुट के विधायकों ने लिया था और उसी आधार पर मुख्यमंत्री ने राज्यपाल को नाम भेजा, जिसके बाद सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाया गया।

उन्होंने सवाल उठाया कि अगर किसी को दोष देना है तो क्या वे अजित पवार गुट के विधायकों को दोष देंगे या फिर मुख्यमंत्री को? राम कदम ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि इस तरह की बातें करना बचकानी सोच को दर्शाता है।

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