हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल के प्रधान सचिव रहे वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एमएल वर्मा की 34वीं शहादत जयंती रविवार को पूरे सम्मान और श्रद्धा के साथ मनाई गई। इस अवसर को आतंकवाद विरोधी दिवस के रूप में मनाते हुए राज्य भर में स्मृति कार्यक्रम आयोजित किए गए। श्रद्धांजलि समारोह का मुख्य कार्यक्रम एमएल वर्मा के पैतृक गांव लालहारी कलां (यमुनानगर) में आयोजित किया गया, जहां बड़ी संख्या में प्रशासनिक अधिकारियों, सामाजिक संगठनों, पूर्व सैनिकों और ग्रामीणों ने भाग लिया।
वर्मा के भाई और अंबाला संभागीय आयुक्त, आईएएस संजीव वर्मा भी कार्यक्रम में उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि एमएल वर्मा का बलिदान न केवल प्रशासनिक सेवा के लिए बल्कि संपूर्ण समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। 1 फरवरी 1992 को आईएएस अधिकारी एमएल वर्मा की उस समय हत्या कर दी गई जब आतंकवादियों ने चंडीगढ़ से कक्करमकरा जाते समय उनके वाहन पर अंधाधुंध गोलीबारी की। इस हमले में एमएल वर्मा, उनकी पत्नी प्रीति वर्मा, उनके दो छोटे बेटे गौरव और सौरभ, ड्राइवर और हमलावर की मौके पर ही मौत हो गई।
1972 बैच के एचसीएस अधिकारी एमएल वर्मा 1988 में आईएएस अधिकारी बने। अपने करियर के दौरान, एमएल वर्मा को हरियाणा और पंजाब के बीच एसवाईएल नहर विवाद और राजधानी शहर विवाद जैसे संवेदनशील मुद्दों की जिम्मेदारी सौंपी गई, जिसके कारण वे लंबे समय तक आतंकवादी हमलों का निशाना बने रहे।


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