अजनाला के पास धारीवाल कलेर गांव में पड़ोसियों के बीच हुई शादी ने बवाल खड़ा कर दिया है, जिसके चलते ग्राम पंचायत ने गांव के भीतर विवाह पर प्रतिबंध लगाने और सामाजिक बहिष्कार की धमकी देने वाला एक विवादास्पद प्रस्ताव पारित किया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह हालिया शादी कोई अकेली घटना नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में इसी तरह की कम से कम छह शादियां हो चुकी हैं, जिनमें एक ही गांव के लड़के-लड़कियों की शादी हुई है। उनका दावा है कि यह सिलसिला दूसरे गांवों में भी जारी है।
स्थानीय गुरुद्वारे के ग्रंथी बाबा गुरलाल सिंह कहते हैं, “हमारे गांव में पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जिनमें लड़कियों के परिवार कुछ समय बाद समझौता कर लेते थे। कुछ दंपत्ति तो अब भी यहीं रह रहे हैं।” हालांकि, इस बार लड़की के परिवार ने मदद के लिए समुदाय से संपर्क किया है।
कुछ दिन पहले पंचायत ने सर्वसम्मति से गांव के भीतर होने वाले विवाहों के सामाजिक बहिष्कार की घोषणा की। इस प्रस्ताव के अनुसार, गांव का कोई भी पुरुष जो उसी गांव की महिला से विवाह करेगा, उसे सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ेगा। ऐसे जोड़ों को गांव में रहने से रोक दिया जाएगा, और यदि उनके परिवार वाले उनकी मदद करते हैं तो उन पर भी बहिष्कार लागू होगा।
गांव के निवासी इस सांस्कृतिक ‘पतन’ का मूल कारण नशे को मानते हैं। एक बुजुर्ग निवासी का आरोप है कि इन शादियों में शामिल लड़के नशीली दवाओं की तस्करी से जुड़े हुए हैं। उनका कहना है, “उनका पैसा और दिखावटी जीवनशैली लड़कियों और कुछ मामलों में उनके परिवारों को भी प्रभावित करती है।” उन्होंने आगे बताया कि गांव के कम से कम 15 युवकों की मौत नशे के कारण हुई है।
गांव के बुजुर्गों का कहना है कि पारंपरिक रूप से एक ही गांव में विवाह से परहेज किया जाता रहा है, क्योंकि निवासी खुद को एक बड़े परिवार का हिस्सा मानते हैं। उनका तर्क है कि यह प्रस्ताव उन तनावों को रोकने के लिए लाया गया है जिन्होंने पहले गांव के जीवन को अशांत कर दिया था।
हालांकि, सामाजिक कार्यकर्ताओं और कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि विवाह एक व्यक्तिगत अधिकार है और सामाजिक बहिष्कार एक प्रकार का दबाव है। इस फैसले का बचाव करते हुए सरपंच राजपाल सिंह कहते हैं, “हम प्रेम विवाह के खिलाफ नहीं हैं। अगर कोई लड़का या लड़की गांव से बाहर शादी करता है तो हमें कोई आपत्ति नहीं है। हम कानून को चुनौती नहीं दे रहे हैं, लेकिन रीति-रिवाजों का सम्मान करना जरूरी है।”


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