अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरेंद्र सिंह की अदालत ने 2020 में गोहाना के बुटाना गांव के पास एक पुलिसकर्मी और एक विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) की हत्या के आरोप में एक महिला और “कानून से संघर्ष कर रहे एक बच्चे” सहित चार लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
आरोपियों में से एक को “घोषित अपराधी” घोषित कर दिया गया है, जबकि दूसरा आरोपी पुलिस मुठभेड़ में मारा गया।
घटना की सूचना 30 जून, 2020 को पुलिस को दी गई। जानकारी के अनुसार, बुटाना पुलिस चौकी पर तैनात कांस्टेबल रविंदर और एसपीओ कप्तान सिंह 29 जून की रात गश्त पर थे। हरियाली केंद्र के पास पहुंचने पर उन्होंने सड़क पर एक कार खड़ी देखी और कुछ युवक वहां शराब पी रहे थे। दो लड़कियां भी वहां मौजूद थीं। पुलिसकर्मियों ने उन्हें पुलिस चौकी ले जाने का प्रयास किया, लेकिन आरोपियों ने उन पर धारदार हथियारों से हमला कर उनकी हत्या कर दी।
आरोपियों में से एक, जिंद के अजमेर बस्ती निवासी अमित मुठभेड़ में मारा गया। उसने पुलिस टीम पर भी हमला किया था और इंस्पेक्टर समेत दो पुलिसकर्मियों को चोटें आईं थीं। पुलिस ने इस मामले में हिसार के संदीप, भिवानी के विकास और जिंद के नीरज को गिरफ्तार किया; साथ ही आशा नाम की एक महिला और एक नाबालिग को भी गिरफ्तार किया। जमानत मिलने के बाद विकास फरार हो गया और अदालत ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया।
अदालत ने सीसीएल, आशा, नीरज और संदीप को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही, दोषियों पर 7,500 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।


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