February 12, 2026
National

बांग्लादेश चुनाव पर भारतीय नेताओं ने दी प्रतिक्रिया, लोकतंत्र और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का उठाया मुद्दा

Indian leaders react to Bangladesh elections, raise issues of democracy and protection of minorities

12 फरवरी । बांग्लादेश में संसदीय चुनाव के बीच भारत में सियासी हलकों में प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। अलग-अलग दलों के नेताओं ने वहां की स्थिति, लोकतांत्रिक प्रक्रिया और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर चिंता और उम्मीदें जाहिर की हैं।

भाजपा विधायक बालमुकुंदाचार्य ने कहा, “भविष्य में बांग्लादेश में जो भी सरकार सत्ता में आए, मैं उन्हें शुभकामनाएं देता हूं। लेकिन, साथ ही यह याद दिलाना चाहता हूं कि हाल के वर्षों में वहां का माहौल सांप्रदायिक और उग्रवादी गतिविधियों से प्रभावित रहा है। चरमपंथी और जिहादी ताकतों ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाने और प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रपति जैसे निर्वाचित पदाधिकारियों को निशाना बनाने की कोशिश की है।”

भाजपा सांसद नरेश बंसल ने कहा, “बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ जिस तरह अत्याचार हो रहे हैं, वह ठीक नहीं है। हम उम्मीद करते हैं कि वहां आज मतदान शांतिपूर्ण ढंग से हो और जो नई सरकार आए, वह अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार को रोके।”

भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, “बांग्लादेश हमारा पड़ोसी देश है। वहां की स्थिति क्रूर और दमनकारी ताकतों के जंगल जैसी हो गई है। जरूरत एक संवेदनशील और अच्छी सरकार की है, जो वहां के लोगों की चिंताओं को समझे और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे। ऐसी सरकार सत्ता में आनी चाहिए।”

भाजपा विधायक विक्रम रंधावा ने कहा, “बांग्लादेश की हालत दुनिया से छिपी नहीं है। जिस तरह टारगेट किलिंग हो रही है, खासकर हिंदुओं की, ये गंभीर मामले हैं।”

जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने कहा, “गुरुवार को वहां चुनाव हो रहे हैं। जो भी सरकार बने, भारत सरकार और भारत के लोग यह देखना चाहते हैं कि एक समझदार सरकार आए, जो हर नागरिक का ख्याल रखे, चाहे वे अल्पसंख्यक हिंदू हों, मुसलमान हों, सिख हों या कोई और। आखिर वे सभी बांग्लादेशी नागरिक हैं।”

शिवसेना प्रवक्ता शाइना एनसी ने बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों का मुद्दा उठाते हुए कहा, “जो लोग घुसपैठिए हैं, चाहे बांग्लादेशी हों या रोहिंग्या और जो मुंबई को अस्थिर करना चाहते हैं, उन्हें हटाना हमारा कर्तव्य है। जब ऐसे लोग विदेशी दस्तावेजों के साथ भारत और मुंबई को अस्थिर करने की कोशिश करते हैं और फुटपाथों पर कब्जा करते हैं, तो इससे मुंबईकरों पर बोझ बढ़ता है। सार्वजनिक स्थानों का लाभ मुंबई के नागरिकों को मिलना चाहिए। हालांकि इसके लिए उचित सत्यापन और दस्तावेजों की जांच भी जरूरी है।”

कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कहा, “हमने बांग्लादेश को उसकी साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत से जाना है। ‘आमार सोनार बांग्ला’ जैसे गीतों और साहित्य ने उसे पहचान दी। मौजूदा स्थिति, खासकर अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में, दिखाती है कि कट्टरता बढ़ी है। जरूरी है कि वहां लोकतंत्र कायम रहे और लोग शांति के साथ बेहतर विकल्प चुन सकें।”

कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने कहा, “बांग्लादेश का चुनाव भारत के लिए स्वाभाविक रूप से महत्वपूर्ण है। अगर हमारा पड़ोसी देश संस्कृति और सभ्यता को बनाए रखता है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव दोनों देशों पर पड़ेगा।”

शिवसेना (यूबीटी) की राज्यसभा सदस्य प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, “हम उम्मीद करते हैं कि इन चुनावों के जरिए वहां एक स्थिर सरकार बने, जो लोकतंत्र के सिद्धांतों को लागू करे और सभी को समान अधिकार दे। दुख की बात है कि अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं पर लगातार हमले, हत्याएं और लिंचिंग होती रहीं और हमारी सरकार चुप रही।”

सीपीआई(एम) के राज्यसभा सदस्य वी. शिवदासन ने कहा, “बांग्लादेश में कई मामले सामने आए हैं। वहां जमात-ए-इस्लामी जैसी संगठनात्मक ताकतें सत्ता पर कब्जा करने की कोशिश कर रही हैं। ये कट्टरपंथी ताकतें वैसी ही भूमिका निभा रही हैं, जैसी यहां आरएसएस कर रही है। मेरा मानना है कि भविष्य में लोकतांत्रिक ताकतें सफल होंगी और बांग्लादेश के लोगों को शांतिपूर्ण माहौल मिलेगा।”

राजस्थान सरकार के मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने कहा, “किसी भी देश में अलोकतांत्रिक सरकार के लिए जगह नहीं है। बांग्लादेश में जिस तरह हिंदू विरोधी विचारधाराओं को बढ़ावा दिया गया और लोगों को संरक्षण दिया गया, वह आपत्तिजनक और अस्वीकार्य है। भारत सरकार ने इसकी कड़ी निंदा की है, हिंदू भाइयों की सुरक्षा का आश्वासन दिया है और चेतावनी भी जारी की है।”

जम्मू में नेशनल कॉन्फ्रेंस विधायक जावेद हसन बेग ने कहा, “यह एक ऐसी कवायद है जैसे बहरे और गूंगे लोगों के बीच हो रही हो। वहां भावनात्मक राजनीति, धर्म के नाम पर राजनीति और नफरत की राजनीति हो रही है।”

सीपीआई(एम) विधायक मोहम्मद यूसुफ तारीगामी ने कहा, “हम चुनाव के पक्ष में हैं। बांग्लादेश के लोगों को अपनी सरकार चुनने का अधिकार है। जब मैच खेला जाता है, तो उसे सही तरीके से पूरा होना चाहिए। वहां की मुख्य पार्टी अवामी लीग पर प्रतिबंध है, तो मुकाबला एकतरफा हो जाता है।”

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