आज यहां विधानसभा के बाहर पेंशनभोगियों ने विरोध प्रदर्शन किया और सरकार पर पेंशनभोगी विरोधी नीतियां अपनाने और उनकी मांगों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। हिमाचल प्रदेश पेंशनभोगी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सरकार ने वित्तीय संकट का हवाला देते हुए उनके महंगाई भत्ते, बकाया और अन्य वित्तीय लाभ रोक रखे हैं, जबकि जन प्रतिनिधियों के वेतन और भत्ते बढ़ाए जा रहे हैं।
उनकी मांगों में 2016 और 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों को ग्रेच्युटी, अवकाश नकदीकरण, विनिमय और संशोधित पेंशन का भुगतान, 13 प्रतिशत महंगाई भत्ता और लंबित बकाया राशि का भुगतान, विभिन्न बोर्डों, निगमों आदि के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन का समय पर भुगतान शामिल था।
समिति के अध्यक्ष सुरेश ठाकुर ने कहा कि अगर उनके प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए नहीं बुलाया गया, तो बजट पेश होने के दिन हजारों पेंशनभोगी विधानसभा के बाहर विरोध प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो पेंशनभोगी पीछे नहीं हटेंगे और अगला प्रदर्शन और भी बड़ा होगा।


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