हरियाणा सरकार ने मंगलवार को आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ शाखा में सरकारी खातों से जुड़े 590 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी मामले के सभी पहलुओं की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया, वहीं मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विधानसभा को सूचित किया कि इस मामले से जुड़े 556 करोड़ रुपये 24 घंटे के भीतर बरामद कर लिए गए हैं।
वसूली गई राशि में लगभग 22 करोड़ रुपये ब्याज के रूप में शामिल हैं, जिसे विभिन्न राज्य विभागों, बोर्डों और निगमों के खातों में वापस जमा कर दिया गया है। चार सदस्यीय समिति में एसीएस (वित्त) अरुण गुप्ता, विकास एवं पंचायत निदेशक अनीश यादव, पंचकुला नगर निगम आयुक्त विनय कुमार और एचपीएससी के उप सचिव सतीश कुमार शामिल हैं। इसे आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के पैनल में शामिल होने, विभागों द्वारा इन बैंकों में बड़ी मात्रा में धनराशि जमा करने के निर्णयों, खातों के मिलान न होने और किसी भी प्रक्रियात्मक चूक की जांच करने का कार्य सौंपा गया है।
यह पैनल राज्य की बैंकिंग नीति के प्रावधानों की समीक्षा करेगा, विभागों द्वारा अनुपालन का आकलन करेगा, जवाबदेही तय करेगा और सुधारात्मक, निवारक और अनुशासनात्मक उपायों की सिफारिश करेगा। इसे अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए एक महीने का समय दिया गया है। बजट सत्र के दौरान सदन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार और वरिष्ठ बैंक अधिकारियों के बीच समन्वित प्रयासों के माध्यम से ही त्वरित सुधार संभव हो पाया।
इसे जनविश्वास का मामला बताते हुए सैनी ने कहा कि यह धनराशि 28 लाख नागरिकों की मेहनत की कमाई है। उन्होंने जोर देकर कहा, “जनता का एक-एक रुपया सुरक्षित रखा जाएगा और केवल जन कल्याण पर ही खर्च किया जाएगा।” कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “हरियाणा में शासन व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन आया है। भ्रष्टाचार के मामलों को दबाने का युग समाप्त हो गया है। हम पूर्ण पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन के साथ काम करते हैं,” साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों की सराहना की।


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