जसवान-प्रागपुर के विधायक बिक्रम ठाकुर ने बुधवार को शिमला में हिमाचल प्रदेश पुलिस और दिल्ली पुलिस के बीच हुए तनाव और टकराव को राज्य की कानून व्यवस्था और संवैधानिक गरिमा पर सीधा हमला बताया है। बिक्रम ने आज यहां जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि यह न केवल दो राज्यों की पुलिस के बीच क्षेत्राधिकार का विवाद है, बल्कि एक राजनीतिक रूप से पोषित संकट भी है, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर राज्य की प्रशासनिक विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगा दिया है।
विधायक ने कहा कि दिल्ली पुलिस शिमला में एक गंभीर मामले में कार्रवाई करने आई थी, लेकिन राज्य सरकार के दबाव में हिमाचल प्रदेश पुलिस ने दिल्ली पुलिस कर्मियों को हिरासत में ले लिया और उन पर अपहरण का गंभीर आरोप लगाकर मामला दर्ज कर लिया। उन्होंने आरोप लगाया, “यह कोई प्रशासनिक चूक नहीं है, बल्कि राज्य सरकार द्वारा रची गई एक सुनियोजित राजनीतिक साजिश है, जिसका उद्देश्य आरोपियों को बचाना और सच्चाई से ध्यान भटकाना है।” उन्होंने दोनों राज्यों की पुलिस के बीच इस टकराव को एक खतरनाक मिसाल बताया, जिससे केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय कमजोर होता है।
विधायक ने दावा किया कि जांच के दायरे में आया मामला अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की छवि से जुड़ा है, जिससे यह एक बेहद संवेदनशील मुद्दा बन जाता है। उन्होंने आगे कहा, “अगर कोई सरकार ऐसे मामलों में निष्पक्ष कानून प्रवर्तन के बजाय राजनीतिक हितों को प्राथमिकता देती है, तो यह संघीय ढांचे का अपमान और लोकतांत्रिक सिद्धांतों पर हमला है।”


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