March 5, 2026
National

दुबई से अहमदाबाद पहुंची रिलीफ फ्लाइट, 170 यात्री सुरक्षित वापस लौटे

Relief flight from Dubai reaches Ahmedabad, 170 passengers return safely

5 मार्च । दुबई से एक रिलीफ फ्लाइट एफजेड 8437 गुरुवार सुबह 4:40 बजे अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंड हुई। इस फ्लाइट में करीब 170 यात्री सवार थे, जो दुबई में फंसे हुए थे और अब सकुशल भारत लौट आए हैं। मौजूदा हालात को देखते हुए इस फ्लाइट को चलाया गया ताकि फंसे हुए यात्रियों को वापस लाया जा सके। सभी यात्रियों के सुरक्षित पहुंचने के बाद उनके परिवारों ने भी राहत की सांस ली है।

दुबई से अहमदाबाद पहुंचे यात्रियों ने वहां के हालात को लेकर कई बातें साझा कीं। अहमदाबाद पहुंचे एक यात्री विनोद तोलानी ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से दुबई में हालात ऐसे बन गए थे कि लग रहा था कि अगले तीन से चार दिनों तक कोई भी फ्लाइट नहीं चलेगी। उन्होंने बताया कि 9 तारीख तक की ज्यादातर उड़ानें कैंसिल कर दी गई थीं। ऐसा लग रहा था कि स्थिति सामान्य होने में काफी समय लग सकता है।

विनोद तोलानी ने बताया कि हाल ही में जो ईरान के हमले की घटनाएं हुईं, उसके बाद माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया था। हालांकि स्थानीय सुरक्षा एजेंसियां और सेना स्थिति को संभालने की कोशिश कर रही थीं। इसी बीच अचानक कुछ उड़ानें दोबारा शुरू होने की खबर आई, जो वहां फंसे लोगों के लिए एक बड़ी राहत की बात थी। फ्लाइट शुरू होना जितना राहत देने वाला था, उतना ही बड़ा सवाल टिकट के बढ़े हुए दामों को लेकर भी था।

आम यात्रियों के लिए इतनी महंगी फ्लाइट लेना बहुत मुश्किल हो गया था। उन्होंने बताया कि कुछ फ्लाइट्स के टिकट 80-90 हजार रुपये तक पहुंच गए थे, जबकि एक फ्लाइट का किराया तो करीब 1.90 लाख तक बताया जा रहा था। उन्होंने कहा कि इतने ज्यादा किराये में सामान्य परिवार के लिए टिकट खरीदना बेहद कठिन हो जाता है।

विनोद ने बताया कि दुबई एयरपोर्ट के बाहर हजारों की संख्या में भारतीय नागरिक थे। एयरपोर्ट के अंदर केवल उन्हीं लोगों को जाने दिया जा रहा था जिनके पास कन्फर्म टिकट था। बाकी लोग बाहर ही इंतजार कर रहे थे। कई लोग पिछले कई दिनों से वहीं रुके हुए थे और अपने घर लौटने का इंतजार कर रहे थे।

जो यात्री एयरपोर्ट के अंदर फंसे हुए थे, उन्हें कुछ सुविधाएं दी गई थीं, जैसे होटल में ठहरने की व्यवस्था। वहीं, जो लोग एयरपोर्ट के बाहर थे, उन्हें ऐसी कोई सुविधा नहीं मिल पाई। कई लोग खुद ही इंतजाम करके किसी तरह समय काट रहे थे।

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