संसद में सोमवार को मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव, ऊर्जा सुरक्षा और ईंधन की बढ़ती कीमतों को लेकर विपक्ष ने सरकार से विस्तृत चर्चा की मांग की है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी समेत कई विपक्षी दलों ने कहा कि यह मुद्दा सीधे देश के आम लोगों और भारत की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है, इसलिए इस पर संसद में गंभीर बहस जरूरी है।
कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “मौजूदा हालात की गंभीरता और पूरे क्षेत्र पर उसके असर को देखते हुए संसद में इस विषय पर चर्चा कराना बेहद आवश्यक है।” उन्होंने बताया कि कांग्रेस ने इस मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव पेश किया है, ताकि सदन में तुरंत चर्चा हो सके। पार्टी लोकसभा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव भी लेकर आई है, लेकिन फिलहाल सबसे जरूरी मुद्दा देश के आम लोगों पर पड़ रहा असर है।
वेणुगोपाल ने कहा कि ईंधन की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और खाड़ी देशों में रह रहे भारतीय नागरिक अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं, लेकिन सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही है। कांग्रेस नेता शशि थरूर ने भी इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि संसद का मूल उद्देश्य ही देश से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करना है। अगर संसद में ऐसे मामलों पर चर्चा नहीं होगी तो फिर संसद की अहमियत ही क्या रह जाएगी।
थरूर ने बताया, “मध्य पूर्व में तनाव के कारण भारत की ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हो रही है। उनके अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है और कतर से गैस की आपूर्ति भी फिलहाल बंद हो गई है, क्योंकि वहां ‘फोर्स मेज्योर’ घोषित कर दिया गया है। हमारी फैक्ट्रियों में अभी उस तरफ से भारत में गैस नहीं आ रही है। आप ईस्ट से ले सकते हैं, इसलिए हम कुछ सप्लाई लेने की कोशिश करेंगे, लेकिन हम निश्चित रूप से परेशान हैं।”
उन्होंने कहा कि कीमतें बढ़ रही हैं, एलपीजी की कीमतों में 60 रुपए की वृद्धि हुई है और पेट्रोल की कीमत भी बढ़ने वाली है। इसलिए यह सब हमारे देश के लिए एक गंभीर समस्या बनने वाला है और इसलिए सरकार को एक जिम्मेदार और सक्रिय दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है। मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि हम सांसद में यही चाहते हैं, हमारे देश के लिए जरूरी और हमारे लोगों पर असर डालने वाले सभी मामलों पर हाउस के अंदर चर्चा होनी चाहिए।
वहीं समाजवादी पार्टी के प्रमुख और सांसद अखिलेश यादव ने भी सरकार से विदेश नीति और तेल खरीद नीति पर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह चिंता की बात है कि अमेरिका तय कर रहा है कि भारत किस देश से तेल खरीदे। यादव ने कहा कि भारत की विदेश नीति और इस संकट को सरकार किस तरह संभाल रही है, इस पर संसद में खुलकर बहस होनी चाहिए।


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