मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच आंध्र प्रदेश सरकार ने राज्य के एक्वा किसानों से घबराने या जल्दबाजी न करने की अपील की है। सरकार का कहना है कि इस संकट का भारत के समुद्री खाद्य निर्यात पर फिलहाल कोई बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है। राज्य के कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन मंत्री किंजारापु अच्चन्नायडु ने बुधवार को आंध्र प्रदेश स्टेट एक्वाकल्चर डेवलपमेंट अथॉरिटी (अप्सडा) के सह-उपाध्यक्ष, गैर-सरकारी समिति और एक्वाकल्चर सलाहकार समिति के सदस्यों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस कर मौजूदा स्थिति की समीक्षा की।
मंत्री ने कहा कि मीडिया में चल रही खबरों के कारण कुछ एक्वा किसान चिंतित हो गए हैं, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने बताया कि भारत के कुल समुद्री खाद्य निर्यात का केवल 3 से 4 प्रतिशत ही मध्य-पूर्व देशों को जाता है और वह भी मुख्य रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते भेजा जाता है।
अच्चन्नायडु ने स्पष्ट किया कि यूरोपीय संघ, अमेरिका, जापान और चीन जैसे अन्य देशों को भेजे जाने वाले समुद्री खाद्य कंटेनर रेड सी–सुएज नहर मार्ग, केप ऑफ गुड होप मार्ग और चीन सागर मार्ग से बिना किसी बाधा के जा रहे हैं। इसलिए मौजूदा हालात से भारत के समुद्री खाद्य निर्यात पर बड़ा प्रभाव पड़ने की आशंका नहीं है।
उन्होंने कहा कि मार्च 2026 के अंत तक अमेरिकी बाजार में मांग बढ़ने की संभावना है। विशेष रूप से 15 से 17 मार्च तक बोस्टन में होने वाले ‘सीफूड एक्सपो नॉर्थ अमेरिका’ के बाद मांग में तेजी आ सकती है। आमतौर पर अमेरिकी बाजार में 50 और 60 काउंट के झींगे की अच्छी मांग रहती है, जो आंध्र प्रदेश के किसान बड़ी मात्रा में पैदा करते हैं। इसलिए इस आकार तक उत्पादन होने से पहले बीच में कटाई करने की जरूरत नहीं है।
मंत्री ने यह भी बताया कि भारतीय झींगे पर अमेरिका द्वारा लगाए गए करीब 20 प्रतिशत शुल्क (बेसिक ड्यूटी, एंटी-डंपिंग ड्यूटी और काउंटरवेलिंग ड्यूटी सहित) अन्य प्रतिस्पर्धी देशों के बराबर ही हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता बनी हुई है। उन्होंने कंटेनरों की कमी से निर्यात प्रभावित होने की खबरों को भी गलत बताया। उनके अनुसार कंटेनरों की कोई कमी नहीं है और आंध्र प्रदेश से भेजे गए कंटेनर सामान्य रूप से चल रहे हैं।
अच्चन्नायडु ने कहा कि हर महीने के अंतिम सप्ताह में समीक्षा बैठक कर निर्यात की स्थिति पर नजर रखी जाएगी और किसानों को समय-समय पर सुझाव दिए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) पूरा होने से भारतीय समुद्री खाद्य निर्यात के लिए नए बाजार खुलेंगे।
मंत्री ने किसानों को सलाह दी कि वे घबराकर जल्दबाजी न करें, क्योंकि इससे बाजार में एक साथ अधिक आपूर्ति हो सकती है, जिससे झींगे की कीमतें गिरेंगी और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। किसानों को अपने उत्पादन चक्र के पूरा होने के बाद ही, निर्यातकों और मत्स्य अधिकारियों की सलाह से कटाई करनी चाहिए।
इस बीच मुख्यमंत्री ने भी जिला कलेक्टरों के सम्मेलन में मध्य-पूर्व की स्थिति के प्रभाव पर टिप्पणी करते हुए कहा कि खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि युद्ध के कारण कृषि क्षेत्र पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को देखते हुए किसानों के हितों की रक्षा के लिए वैकल्पिक बाजारों की तलाश की जाए।
सरकार ने भरोसा दिलाया कि वह अंतरराष्ट्रीय हालात पर लगातार नजर रख रही है और निर्यातकों, प्रोसेसिंग यूनिट्स तथा अन्य संबंधित पक्षों के साथ समन्वय कर राज्य से समुद्री खाद्य निर्यात को बिना बाधा जारी रखने के लिए आवश्यक कदम उठा रही है।


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