March 13, 2026
National

संघ शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों में समाज से मिल रहा जबरदस्त प्रतिसाद : सह सरकार्यवाह सीआर मुकुंद

The Sangh Centenary Year programmes are receiving tremendous response from the society: Co-Sarkaryavah CR Mukund

13 मार्च । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की तीन दिवसीय बैठक शुक्रवार को माधव सृष्टि परिसर में विधिवत शुरू हो गई। सुबह नौ बजे सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने भारत माता के चित्र पर पुष्पार्चन कर बैठक का शुभारंभ किया। बैठक में देशभर से करीब 1400 प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं।

प्रेस वार्ता में सह सरकार्यवाह सीआर मुकुंद ने बताया कि संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों को समाज से मिल रहा प्रतिसाद बेहद प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि समाज की सज्जन शक्ति ने स्वयंसेवकों का उत्साह कई गुना बढ़ा दिया है। शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम 2 अक्टूबर 2025 को नागपुर में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत की मौजूदगी में शुरू हुए थे। इससे एक दिन पहले भारत सरकार ने संघ के नाम पर डाक टिकट और स्मारक सिक्का जारी किया था।

मुकुंद ने बताया कि शताब्दी वर्ष में दो मुख्य लक्ष्य रखे गए हैं। पहला संगठन का विस्तार और दूसरा समाज की सज्जन शक्ति को सद्भाव और समरसता के लिए संगठित करना। इसी उद्देश्य से चल रहे गृह संपर्क अभियान में अब तक देश के कई प्रांतों में 10 करोड़ से ज्यादा घरों और 3 लाख 90 हजार गांवों तक पहुंच बनाई जा चुकी है। बाकी प्रांतों में यह काम जारी है।

खास बात यह है कि संपर्क के दौरान किसी भी वर्ग या समुदाय के प्रति कोई पूर्वाग्रह नहीं रखा गया। सिर्फ केरल का उदाहरण दें तो वहां 55 हजार से ज्यादा मुस्लिम परिवारों और 54 हजार से ज्यादा ईसाई परिवारों में स्वयंसेवकों ने घर-घर जाकर बातचीत की। सभी परिवारों ने स्वयंसेवकों का दिल खोलकर स्वागत किया और अभिनंदन किया।

देशभर में अब तक 37,048 हिंदू सम्मेलनों का आयोजन हो चुका है, जिनमें करीब साढ़े तीन करोड़ लोग शामिल हुए। ये सम्मेलन शहरों, गांवों, जनजातीय इलाकों और दुर्गम क्षेत्रों में भी हुए। अरुणाचल प्रदेश के एक दूर-दराज के इलाके में हुए सम्मेलन में लोगों ने कहा कि वे पहली बार इतनी आत्मीयता महसूस कर रहे हैं। इन सम्मेलनों के जरिए समाज में सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी के प्रति गर्व, परिवार व्यवस्था की मजबूती और नागरिक कर्तव्यों की जागरूकता जैसे पंच परिवर्तन का संदेश दिया जा रहा है।

सीआर मुकुंद ने बताया कि प्रमुख नागरिकों के साथ संगोष्ठियां भी आयोजित की गई हैं। सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत खुद चार महानगरों और कई राज्यों की राजधानियों में जाकर लोगों से सीधा संवाद कर रहे हैं। सिर्फ चार महानगरों के कार्यक्रमों में एक हजार से ज्यादा सवालों के जवाब दिए गए, जिसमें 20 घंटे से ज्यादा समय लगा।

संघ कार्य के विस्तार पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में 3,943 नए स्थानों पर काम शुरू हुआ है। शाखाओं की संख्या 51,740 से बढ़कर 55,683 हो गई है और शाखाओं की कुल संख्या 83,129 से बढ़कर 88,949 हो गई है। यानी एक साल में 5,820 नई शाखाएं शुरू हुई हैं। संघ का लक्ष्य है कि गांवों और कस्बों में और ज्यादा शाखाएं चलें ताकि समाज में सकारात्मक बदलाव आए।

नक्सल प्रभावित इलाकों में सरकार के शांति और विकास के प्रयासों का संघ ने स्वागत किया। मणिपुर में शांति बहाल होने पर भी संतोष जताया गया और वहां स्वयंसेवकों की भूमिका की सराहना की। बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति पर चिंता जताई गई और उम्मीद जताई कि वहां हालात जल्द बेहतर होंगे।

मुकुंद जी ने बताया कि बैठक की शुरुआत में दिवंगत हुए कई प्रमुख व्यक्तित्वों को श्रद्धांजलि दी गई। इनमें सतगुरुदास महाराज, डॉ. माधव गाडगिल, शिवराज पाटिल, सालुमरदा थिमक्का, केएन दीक्षित, अजीत पवार, धर्मेंद्र, एवीएम सरवनन, स्वराज कौशल, विनय हेगड़े, आर नल्लकणु और प्रफुल्ल गोविंद बरुआ जैसे नाम शामिल हैं।

संघ का शताब्दी वर्ष कार्यक्रम अक्टूबर 2026 तक विभिन्न गतिविधियों के साथ जारी रहेगा। संघ का उद्देश्य समाज की सज्जन शक्ति को एकजुट कर राष्ट्र निर्माण में योगदान देना है। प्रेस वार्ता में अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेंद्र ठाकुर और प्रदीप जोशी सहित अन्य पदाधिकारी भी मौजूद रहे।

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