विपक्ष के नेता जय राम ठाकुर ने मंगलवार को राज्य सरकार के उस फैसले को खारिज कर दिया, जिसमें राजनीतिक नियुक्तियों से मंत्रिमंडल का दर्जा वापस लेना और वेतन में कटौती करना शामिल है। उन्होंने इसे वित्तीय अनुशासन के वास्तविक प्रयास के बजाय एक दिखावटी कदम बताया। मीडियाकर्मियों से बात करते हुए उन्होंने तर्क दिया कि यह कदम बहुत देर से उठाया गया है, और कहा कि अदालत द्वारा मुख्य संसदीय सचिवों (सीपीएस) को हटाने के आदेश के तुरंत बाद इसे लागू किया जाना चाहिए था।
ठाकुर ने सरकार पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने सतही उपायों का सहारा लिया है और फिजूलखर्ची रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री पर विधानसभा को बार-बार गुमराह करने का भी आरोप लगाया और इसे प्रशासन की कार्यशैली का एक पैटर्न बताया।
प्रक्रियात्मक मानदंडों पर चिंता जताते हुए ठाकुर ने कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा में देरी हिमाचल प्रदेश के संसदीय इतिहास में अभूतपूर्व है और यह सरकार के भीतर भ्रम और दिशाहीनता का संकेत है।


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