31 मार्च । लोकसभा में सोमवार को बताया गया कि एशियाटिक सोसाइटी, कोलकाता, ने 23 मार्च तक कुल 2,033 पांडुलिपियों को स्कैन किया है। इन पांडुलिपियों में कुल 1,46,099 पेज शामिल हैं। यह काम तब किया गया जब इस संस्था को ज्ञान भारतम् मिशन के तहत पांडुलिपियों की स्कैनिंग के लिए क्लस्टर सेंटर बनाया गया।
केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने लिखित जवाब में बताया कि एशियाटिक सोसाइटी में सुरक्षा के लिए जरूरी इंतजाम किए गए हैं। यहां आग से बचाव के सिस्टम और आपदा से निपटने के नियम मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि संस्था का राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), पश्चिम बंगाल सरकार के फायर और इमरजेंसी विभाग और स्थानीय पुलिस से लगातार संपर्क बना रहता है।
मंत्री ने बताया कि सोसाइटी अब तक 11,528 पांडुलिपियों को डिजिटाइज कर चुकी है, जिनमें कुल 5,72,890 पेज हैं।
उन्होंने कहा कि मंत्रालय से मिलने वाली आर्थिक मदद से संस्था के मुख्य काम चलते हैं और जरूरत के अनुसार समय-समय पर इसकी समीक्षा की जाती है।
शेखावत ने बताया कि एशियाटिक सोसाइटी की ऐतिहासिक इमारत भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधीन है और उसकी मरम्मत व संरक्षण का काम एएसआई द्वारा किया जाता है।
उन्होंने यह भी कहा कि सोसाइटी के म्यूजियम में रखी पांडुलिपियों, दुर्लभ किताबों और वस्तुओं के लिए सही तापमान और नमी बनाए रखने की व्यवस्था है।
सोसाइटी समय-समय पर अपनी पांडुलिपियों और दुर्लभ वस्तुओं की स्थिति की जांच करती रहती है। यह काम कैटलॉग बनाने वाले कर्मचारी और अन्य अधिकारी क्यूरेटर की निगरानी में करते हैं।
उन्होंने बताया कि संस्था के पास अपना संरक्षण और बाइंडिंग सेक्शन भी है। 2022 में पांडुलिपि संरक्षण केंद्र बनने के बाद से 35,624 पन्नों का संरक्षण और 4,596 दुर्लभ पन्नों की मरम्मत की जा चुकी है। म्यूजियम और आर्काइव सेक्शन में कैटलॉग बनाना एक नियमित प्रक्रिया है।


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