हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने रविवार को आरोप लगाया कि भाजपा की तथाकथित “दोहरे इंजन” वाली सरकार के तहत राज्य के किसान “दोहरे प्रभाव” का सामना कर रहे हैं, जिससे वे परेशान और असहाय हो गए हैं।
उन्होंने दावा किया कि सरकार “जानबूझकर कृषि और मंडी व्यवस्था को खत्म करने की कोशिश कर रही है”। चौटाला ने कहा कि प्रशासनिक खामियों के कारण पूरी तरह से पकी हुई फसलें अभी भी खेतों में पड़ी हैं, जबकि राज्य भर की मंडियों में पिछले चार दिनों से गेहूं की खरीद नगण्य रही है।
उन्होंने कहा, “जहां खरीद प्रक्रिया चल रही है, वहां भी किसानों को नई खरीद प्रणाली की आड़ में परेशान किया जा रहा है। किसान और कमीशन एजेंट दोनों ही खुले तौर पर इन उपायों का विरोध कर रहे हैं।”हाल ही में प्रतिकूल मौसम का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि किसान अपनी गेहूं और सरसों की फसल को तत्काल बेचना चाहते हैं, लेकिन मंडियों में अपर्याप्त व्यवस्था के कारण उन्हें असुविधा हो रही है।
उन्होंने आगे कहा कि मंडियों में उपज लाने वाले किसानों को नमी की सीमा, सत्यापन प्रक्रिया, गेट पास और बायोमेट्रिक अंगूठे के प्रमाणीकरण जैसी “जटिल प्रक्रियाओं” का सामना करना पड़ रहा था। उन्होंने कहा, “किसानों को पूरा एमएसपी नहीं मिल रहा है, क्योंकि अधिक नमी के नाम पर कटौती की जा रही है। सरकार उनकी दुर्दशा के प्रति उदासीन प्रतीत होती है।”


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