April 9, 2026
National

सुप्रीम कोर्ट में आधार को लेकर पीआईएल, केवल छह साल तक के बच्चों का आधार बनाने की मांग

PIL in Supreme Court regarding Aadhaar, demanding Aadhaar for children up to six years of age only

9 अप्रैल । सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय ने एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की है, जिसमें उन्होंने मांग की है कि भारत में आधार बनवाने की प्रक्रिया केवल छह साल तक के बच्चों तक ही सीमित हो। उनका कहना है कि अब बड़ों का आधार बनाने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि भारत में पहले ही 144 करोड़ यानी 99 प्रतिशत लोगों के आधार बन चुके हैं।

याचिका में यह भी बताया गया है कि अब जो बड़ों का आधार बन रहा है, उसका फायदा कुछ विदेशी लोग उठा रहे हैं। पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और रोहिंग्या घुसपैठिए कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) पर जाकर पैसे देकर फर्जी आधार बनवा रहे हैं। इसके चलते देश में फर्जी दस्तावेजों की संख्या बढ़ रही है और यह सुरक्षा व जनसंख्या संतुलन के लिए भी खतरा है।

अश्विनी उपाध्याय ने यह भी कहा कि छह साल से ऊपर के लोगों के आधार के लिए अब तहसीलदार या एसडीएम के ऑफिस में ही आवेदन किया जाए। इससे सभी फर्जी आधार बनाने वालों पर नियंत्रण रखा जा सकेगा। पहले भारत में आधार केवल तहसील पर बनता था, लेकिन अब सीएससी पर आधार बनवाने से इस प्रक्रिया में ढील और घुसपैठियों का फायदा हुआ है।

इसके अलावा, याचिका में मांग की गई है कि सीएससी या तहसील में जहां भी आधार बनता है, वहां स्पष्ट रूप से डिस्प्ले बोर्ड लगाया जाए। बोर्ड पर लिखा होना चाहिए कि फर्जी आधार बनाना और बनवाना गंभीर अपराध है और पकड़े जाने पर पांच साल की सजा हो सकती है। यह नियम राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और जन्म प्रमाण पत्र जैसे अन्य दस्तावेजों पर भी लागू किया जाए।

याचिका में यह भी कहा गया है कि आधार, राशन कार्ड या अन्य दस्तावेज के लिए आवेदन करते समय व्यक्ति से एक अंडरटेकिंग ली जाए। इसमें व्यक्ति को लिखित रूप से कहना होगा कि उसने जो जानकारी दी है वह सही है और वह जानता है कि फर्जी दस्तावेज बनाना गंभीर अपराध है। इससे भविष्य में धोखाधड़ी की घटनाओं में कमी आएगी।

अश्विनी उपाध्याय ने यह भी मांग की है कि फर्जी दस्तावेज बनाने वालों को कॉन्करेंट सजा नहीं, बल्कि लगातार सजा दी जाए। भारत में वर्तमान में कनकरेन्ट सजा होती है, मतलब एक साथ सभी धाराओं की सजा शुरू हो जाती है और कुल सजा कम हो जाती है। उन्होंने सुझाव दिया है कि अगर पांच धाराएं हों, तो एक पूरी होने के बाद दूसरी शुरू हो, ताकि सजा का प्रभाव और डर लोगों में हो।

उनका तर्क है कि फर्जी दस्तावेज जैसे आधार, राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, जन्म प्रमाण पत्र आदि से देश की आंतरिक सुरक्षा, संस्कृति, भाईचारा और जनसंख्या संतुलन पर खतरा है। इसलिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से तुरंत कार्रवाई की मांग की है कि छह साल से बड़े बच्चों का आधार बनाना रोका जाए। केवल उन बच्चों का आधार बने जिनके माता-पिता या दादा-दादी का आधार पहले से मौजूद हो। इससे फर्जीवाड़ा रोकने और देश की सुरक्षा बनाए रखने में मदद मिलेगी।

याचिका में कहा गया है कि अब केवल छह साल तक के बच्चों का ही आधार बने और बाकी सभी वयस्कों के लिए तहसील या एसडीएम ऑफिस में ही प्रक्रिया हो। इससे फर्जी आधार की समस्या कम होगी और देश में सुरक्षा, कानून-व्यवस्था मजबूत बनेगी।

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