हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड (एचपीबीओएसई) ने कहा है कि उसने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत कई प्रमुख लक्ष्यों को पूरा किया है और मूल्यांकन एवं आकलन में व्यापक सुधार लागू किए हैं।
इनमें सबसे महत्वपूर्ण है कक्षा 10 से 12 तक के लिए योग्यता-आधारित प्रश्न पत्रों की शुरुआत, जिनका उद्देश्य वैचारिक समझ और विश्लेषणात्मक सोच को मजबूत करना है। कक्षा 9 से 12 तक के लिए भी इसी प्रकार का प्रश्न बैंक विकसित किया गया है, जिससे छात्रों को अभ्यास सामग्री का व्यापक भंडार प्राप्त होता है।
बोर्ड ने माध्यमिक स्तर (कक्षा नौ से बारह) के लिए समग्र प्रगति कार्ड भी लागू किया है, जिससे मूल्यांकन का केंद्र बिंदु केवल अंकों से हटकर छात्र के समग्र विकास पर केंद्रित हो गया है। इसके साथ ही एक क्रेडिट ढांचा भी अपनाया गया है, जिससे शैक्षणिक उपलब्धियां अधिक लचीली और मानकीकृत हो गई हैं।
स्कूलों की गुणवत्ता की निगरानी के लिए, राज्य भर में शैक्षिक मानकों को बनाए रखने के तंत्र के रूप में राज्य स्कूल मानक प्राधिकरण ढांचा स्थापित किया गया है।
विद्यार्थियों के हित में उठाए गए एक कदम के तहत, कक्षा 10 के लिए दोहरी परीक्षा प्रणाली शुरू की गई है, जिससे छात्रों को परीक्षा संबंधी तनाव को कम करने के लिए एक ही शैक्षणिक वर्ष के भीतर दो प्रयास करने की अनुमति मिलती है।
बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने कहा, “एचपीबीओएसई ने राज्य की शिक्षा प्रणाली को एनईपी 2020 के दृष्टिकोण के अनुरूप बनाने में महत्वपूर्ण प्रगति की है। हमारा ध्यान एक पारदर्शी, छात्र-केंद्रित और योग्यता-आधारित शिक्षण वातावरण बनाने पर केंद्रित है।”
उन्होंने आगे कहा कि बोर्ड बहुभाषी दक्षता विकसित करने और छात्रों को राष्ट्रीय और वैश्विक अवसरों के लिए तैयार करने हेतु तीन-भाषा फार्मूला लागू करने की दिशा में काम कर रहा है। डॉ. शर्मा ने यह भी घोषणा की कि कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं के स्पॉट मूल्यांकन का दूसरा चरण 16 अप्रैल से शुरू होगा। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखना बोर्ड की सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी प्रक्रियाओं को तदनुसार सुव्यवस्थित किया गया है।
उन्होंने अधिकारियों, कर्मचारियों और शिक्षकों से ईमानदारी, निष्ठा और गोपनीयता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने का आग्रह किया, साथ ही कहा कि मूल्यांकन एक उन्नत निगरानी प्रणाली के तहत किया जा रहा है ताकि निरंतर निगरानी सुनिश्चित की जा सके और अनियमितताओं की कोई गुंजाइश न रहे।


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