टाइप-1 मधुमेह से पीड़ित बच्चों की देखभाल में सुधार लाने के उद्देश्य से उठाए गए एक कदम के तहत, डॉ. राजेंद्र प्रसाद सरकारी मेडिकल कॉलेज (आरपीजीएमसी), टांडा में इंसुलिन पंप वितरित और स्थापित किए गए हैं।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अतुल गुप्ता की देखरेख में शुरू की गई इस पहल के तहत पंप थेरेपी को पारंपरिक उपचार के विकल्प के रूप में पेश किया गया है। दिन में कई इंजेक्शन लगवाने के विपरीत, यह उपकरण इंसुलिन को लगातार या निर्धारित अंतराल पर देता है, जिससे रक्त शर्करा का स्तर बेहतर ढंग से नियंत्रित होता है और छोटे बच्चों पर बोझ कम होता है। प्रत्येक पंप की कीमत लगभग 2.5 लाख रुपये है और सरकार द्वारा इसे निःशुल्क उपलब्ध कराया गया है।
डॉ. गुप्ता ने बताया कि अब तक 16 बच्चों को इंसुलिन पंप मिल चुके हैं और कार्यक्रम के विस्तार के साथ और भी बच्चों को इसका लाभ मिलेगा। आरपीजीएमसी के प्रिंसिपल डॉ. मिलाप शर्मा के अनुसार, बाल चिकित्सा एंडोक्राइन क्लिनिक में फिलहाल लगभग 140 बच्चे पंजीकृत हैं। उन्होंने आगे बताया कि मुफ्त इंसुलिन उपलब्ध कराने और पंपों की संख्या बढ़ाने के प्रयास जारी हैं।
मधुमेह स्व-प्रबंधन शिक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत बच्चों और उनके अभिभावकों को भी प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसमें इंसुलिन का उपयोग, रक्त शर्करा की निगरानी, आहार योजना और जीवनशैली प्रबंधन शामिल हैं। विभाग की प्रमुख डॉ. सीमा शर्मा ने इस स्थिति के प्रबंधन में नियमित निगरानी और संतुलित आहार के महत्व पर जोर दिया।


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