केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने रविवार को लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक के पारित न होने को जनता के विश्वास और देश भर की महिलाओं के साथ विश्वासघात करार दिया। शुक्रवार को लोकसभा में विधेयक के समर्थन में 298 सदस्यों ने मतदान किया, जबकि 230 सांसदों ने इसके विरोध में मतदान किया। मतदान करने वाले 528 सदस्यों में से विधेयक को दो-तिहाई बहुमत के लिए 352 वोटों की आवश्यकता थी।
खट्टर ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर विधेयक पारित होने में बाधा डालने का आरोप लगाया और कहा कि आगामी चुनावों में उन्हें इसके परिणाम भुगतने पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि इन दलों ने महिलाओं का विश्वास खो दिया है। कुछ सदस्यों ने विधेयक का विरोध किया क्योंकि उन्हें डर था कि यदि महिलाओं के लिए आरक्षण लागू हुआ तो वे अपनी सीट खो देंगे।
खट्टर ने ये टिप्पणियां भाजपा की “महिला जन आक्रोश प्रेस कॉन्फ्रेंस” की अध्यक्षता करते हुए कीं। उनके साथ भाजपा की महिला नेता और उत्तर प्रदेश की महिला कल्याण एवं बाल विकास मंत्री बेबी रानी मौर्य भी मौजूद थीं। खट्टर ने कहा, “16 और 17 अप्रैल को देश की 50 प्रतिशत आबादी के साथ घोर अन्याय हुआ। मैं यहां इसके पीछे के लोगों को बेनकाब करने आया हूं।”
दक्षिणी राज्यों में विधेयक के विरोध की निंदा करते हुए खट्टर ने कहा, “विपक्षी नेताओं का विरोध इस डर से उपजा है कि परिसीमन के बिना, यदि विधेयक पारित हो जाता है तो वे अपनी सीटें (महिलाओं के हाथों) खो देंगे। दक्षिणी राज्य के एक मुख्यमंत्री ने तो चेन्नई में विधेयक की प्रतियां जला भी दीं। इससे अधिक निंदनीय कुछ नहीं हो सकता।”


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