April 21, 2026
Sports

2036 ओलंपिक के लिए लक्ष्य तय कर रहा हरियाणा

Haryana is aiming for the 2036 Olympics.

 

चंडीगढ़, हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने सोमवार को एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक का उद्देश्य खेल, प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा, पोषण और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सरकारी पहलों की प्रगति का आकलन करना था।

 

 

भारत के अग्रणी खेल राज्य के रूप में पहचान बना चुके हरियाणा ने अब 2036 ओलंपिक के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए हैं। सरकार ने ‘मिशन ओलंपिक 2036- विजयी भवः’ की शुरुआत की है। यह एक दीर्घकालिक प्रतिभा पहचान कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य 8 से 10 वर्ष की आयु के बच्चों को विश्व स्तरीय एथलीट के रूप में तैयार करना है, जो पदक जीतने में सक्षम हों। इस कार्यक्रम के लिए प्रारंभिक धनराशि वित्त विभाग की ओर से स्वीकृत कर दी गई है, और इसका क्रियान्वयन खेल विश्वविद्यालय की ओर से किया जाएगा।

 

‘एक जिला, एक खेल’ पहल के तहत जिला स्तर पर प्रतिभा की पहचान का कार्य सक्रिय रूप से किया जा रहा है। इसके जरिए यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि अंबाला से लेकर नूंह तक, हर जिले की खेल प्रतिभाओं को समान मौके मिलें।

 

बजट में घोषित ‘खेलो हरियाणा ऐप’ को भी विकसित किया जा रहा है, ताकि एथलीट्स को खेल से संबंधित जानकारी और अवसरों तक आसानी से पहुंच मिल सके।

 

मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य की प्रगति का आकलन इस बात से होगा कि वह पारदर्शी, तकनीक आधारित और नागरिक-केंद्रित शासन कितना प्रभावी ढंग से दे पाता है। उन्होंने कहा कि राज्य प्रधानमंत्री मोदी के ‘विकसित भारत’ के विजन के अनुरूप राष्ट्रीय विकास एजेंडा में अग्रणी बनने की दिशा में कार्य कर रहा है।

 

महिला एवं बाल विकास विभाग के आयुक्त एवं सचिव शेखर विद्यार्थी ने बताया कि राज्य ने जन्म से छह वर्ष तक के बच्चों के लिए आंगनवाड़ी केंद्रों को गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा संस्थानों में बदलने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है।

 

4,000 से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों को प्री-स्कूल शिक्षा किट, शैक्षणिक खिलौने, फर्नीचर, स्वच्छता सामग्री और आरओ पेयजल सुविधाओं से उन्नत किया गया है, जबकि अतिरिक्त 21,962 केंद्रों को अनुकूलित शिक्षा किट प्रदान की गई हैं।

 

सभी 22 जिलों में 88 राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स के सहयोग से प्रशिक्षित 25,000 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की टीम प्रतिदिन लाखों बच्चों को गुणवत्तापूर्ण देखभाल और प्रारंभिक शिक्षा प्रदान कर रही है।

 

मुख्य सचिव ने महिला एवं बाल विकास विभाग को निर्देश दिया कि प्रत्येक कार्य बिंदु के लिए स्पष्ट और मापनीय लक्ष्य तय किए जाएं तथा निर्धारित समयसीमा के भीतर उनका समय पर क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।

 

बैठक में बताया गया कि एनआईपीयूएन भारत मिशन का विस्तार मार्च 2027 तक कक्षा 5 तक किया जाएगा। साथ ही आंगनवाड़ी केंद्रों को उच्च गुणवत्ता वाले प्री-स्कूल शिक्षा केंद्रों में बदलने की प्रक्रिया पर भी प्रकाश डाला गया।

 

राज्य के युवाओं के स्वास्थ्य और पढ़ाई-लिखाई पर नज़र रखने के लिए, प्रशासन 0 से 6 साल की उम्र के सभी बच्चों के लिए अपार और आभा डिजिटल आईडी जारी करने की प्रक्रिया को तेज कर रहा है। इसके अलावा, स्वास्थ्य विभाग को क्षेत्रीय पौष्टिक व्यंजनों का एक संग्रह तैयार करने और गंभीर कुपोषण से पीड़ित बच्चों के लिए स्वास्थ्य प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन सुनिश्चित करने का काम सौंपा गया है।

 

 

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