पंजाब की राजनीति में राज्यसभा दलबदल को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) के वरिष्ठ नेता दलजीत सिंह चीमा ने शनिवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर जुबानी हमला किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से सीएम मान के मिलने के फैसले को उन्होंने राजनीतिक नाटक करार दिया।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा, “राज्यसभा में दलबदल के मामले पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान का राष्ट्रपति से मिलने के लिए जल्दबाजी करना, राजनीतिक नौटंकी के अलावा और कुछ नहीं है। भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत, सांसदों के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार संसद के दायरे में आता है, न कि राष्ट्रपति के विवेक पर निर्भर करता है। दूसरी बात यह कि दो-तिहाई से अधिक सदस्यों के दलबदल के मामले में दलबदल विरोधी कानून बिल्कुल स्पष्ट है।”
उन्होंने कहा कि शिरोमणि अकाली दल ने पंजाब के मुख्यमंत्री को याद दिलाया कि पंजाब में आपने एसएडी के तीन में से एक विधायक के आपकी पार्टी में शामिल होने को भी मंजूरी दी थी, और तो और उसे एक सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम का चेयरमैन भी बना दिया था, ऐसे उपाय खोजने से पहले, जो संवैधानिक रूप से मौजूद ही नहीं हैं। आम आदमी पार्टी को एक बुनियादी सवाल का जवाब देना चाहिए कि पंजाब के असली आम आदमी प्रतिनिधियों के बजाय, बेहद अमीर बाहरी लोगों को राज्यसभा के लिए नामित करने का मापदंड क्या था?
चीमा ने आगे कहा कि लोगों को यह स्पष्टता भी मिलनी चाहिए कि अगर जवाबदेही ही मूल सिद्धांत है, तो क्या नागरिकों को उन विधायकों को वापस बुलाने का अधिकार है जिन्होंने उन्हें निराश किया है? या फिर आपकी जवाबदेही भी चुनिंदा है? दिल्ली में केवल प्रतीकात्मक याचिकाओं का सहारा लेने के बजाय आप पार्टी को पंजाब की जनता का सामना करना चाहिए। अगर वे सचमुच लोकतांत्रिक नैतिकता में विश्वास रखते हैं, तो उन्हें पंजाब के ‘लोक भवन’ जाना चाहिए और पंजाब के राज्यपाल से नए जनादेश का अनुरोध करना चाहिए। केवल इसी कदम से, न कि केवल संवैधानिक दिखावे से, जनता का विश्वास बहाल हो पाएगा।


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