April 28, 2026
Entertainment

सिर्फ किताबें पढ़कर कोई अभिनेता नहीं बनता : शेखर सुमन

One doesn’t become an actor just by reading books: Shekhar Suman

28 अप्रैल । भारतीय सिनेमा और टेलीविजन इंडस्ट्री के बहुमुखी अभिनेता शेखर सुमन ने आईएएनएस के साथ खास बातचीत में सिद्धांतों और उद्योग में आ रहे बदलावों पर खुलकर चर्चा की। इस बातचीत में उन्होंने नई पीढ़ी के कलाकारों के लिए ‘व्यावहारिक प्रशिक्षण’ की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

शेखर सुमन ने साहिर लुधियानवी की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि एक कलाकार के पास अनुभव और हुनर होता है। जो कुछ भी हमने समाज और दुनिया से सीखा है, उसे आगे आने वाली पीढ़ी तक पहुंचाना बहुत जरूरी है। मुझे लगता है कि ये सही समय है, जब मैं आने वाली पीढ़ी को सही मार्ग दूं।

अभिनेता ने आज की युवा पीढ़ी के बारे में बात करते हुए कहा कि नई पीढ़ी अक्सर भ्रमित रहती है और बहुत जल्दी सफलता पाना चाहती है। अभिनय केवल कैमरे के सामने खड़े होने का काम नहीं बल्कि, यह बोलने के तरीके और व्यवहार का एक गहरा मेल है। हर महान कलाकार का अपना एक अलग अंदाज होता है। यही मौलिकता एक कलाकार को दूसरों से अलग बनाती है।

शेखर ने एक व्यापक एक्टिंग कोर्स की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि केवल किताबें पढ़कर अभिनय नहीं सीखी जा सकती है। क्या आप सिर्फ किताब पढ़कर तैरना या हवाई जहाज उड़ाना सीख सकते हैं? नहीं ना। ठीक यही नियम अभिनय पर भी लागू होता है।

अभिनेता ने भाषा के गिरते स्तर पर बात करते हुए कहा कि 40 के दशक से लेकर एक लंबे समय तक फिल्मों में उर्दू का प्रभाव था और अभिनेता एक खास लय में बात करते थे। आज विविधता तो आई है, लेकिन उच्चारण की शुद्धता कहीं खो गई है। यदि कोई अभिनेता हरियाणा के किरदार के लिए लहजा बदलता है, तो वह समझ में आता है, लेकिन एक सामान्य किरदार निभाते समय यदि शब्दों का उच्चारण गलत हो, तो उसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। आजकल के कलाकार न केवल फिल्मों में, बल्कि इंटरव्यू और निजी बातचीत में भी गलत उच्चारण का प्रयोग करते हैं।

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