पूर्व मंत्री और आईएनएलडी के राष्ट्रीय संरक्षक संपत सिंह ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति को दिए गए कार्यकाल के विस्तार का विरोध करते हुए इस कदम को “चौंकाने वाला, अनुचित और संदिग्ध” बताया है। उन्होंने कहा कि हरियाणा के राज्यपाल और कुलाधिपति असीम कुमार घोष द्वारा जांच के अधीन गंभीर आरोपों के बावजूद प्रोफेसर नरसी राम बिश्नोई का कार्यकाल बढ़ाने का निर्णय प्रशासनिक पारदर्शिता और नैतिकता के बारे में चिंताएं पैदा करता है।
उन्होंने बताया कि प्रो. बिश्नोई उन चार कुलपतियों में शामिल हैं जिनके खिलाफ हरियाणा सरकार ने सतर्कता जांच के आदेश दिए हैं। आरोपों में नियमों का उल्लंघन करके की गई नियुक्तियां और विश्वविद्यालय को हुए वित्तीय नुकसान शामिल हैं। इन मामलों की जांच फिलहाल भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो कर रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि हरियाणा के प्रधान महालेखाकार (लेखा परीक्षा) की रिपोर्ट में विश्वविद्यालय में बड़ी वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। इस फैसले पर सवाल उठाते हुए संपत सिंह ने कहा, “जब इतने गंभीर आरोप और जांच लंबित हैं, तो यह विस्तार किस आधार पर दिया गया है? क्या यह जांच को प्रभावित करने का प्रयास नहीं है?”
उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी परिस्थितियों में सेवा विस्तार प्रदान करने से जांच की निष्पक्षता से समझौता हो सकता है और सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने या अधिकारियों पर दबाव डालने का जोखिम बढ़ सकता है


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