May 11, 2026
Entertainment

मनोज मुंतशिर ने सुनाया शंकर-जयकिशन की पहली मुलाकात का दिलचस्प किस्सा

Manoj Muntashir narrates the fascinating story of Shankar-Jaikishan’s first meeting.

10 मई । संगीत की दुनिया में कुछ जोड़ियां ऐसी होती हैं, जो सिर्फ हिट गाने नहीं देतीं बल्कि इतिहास रच देती हैं। हिंदी सिनेमा की ऐसी ही एक मशहूर जोड़ी थी शंकर–जयकिशन। उनके गाने आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं। रियलिटी शो इंडियन आइडल के आगामी एपिसोड में गीतकार और कवि मनोज मुंतशिर ने इस जोड़ी से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प किस्सा सुनाया।

मनोज मुंतशिर ने बताया कि शंकर और जयकिशन की मुलाकात किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं थी। उन्होंने कहा कि शंकरजी हैदराबाद से मुंबई काम की तलाश में आए थे। उस समय वह एक फिल्म प्रोड्यूसर के ऑफिस के लगातार चक्कर लगाया करते थे। लेकिन महीनों तक उन्हें सिर्फ इंतजार ही मिलता रहा। एक दिन उन्होंने देखा कि ऑफिस के सोफे के कोने में एक लड़का (जयकिशन) चुपचाप बैठा रहता है। शंकरजी ने उससे पूछा कि ‘तुम यहां क्यों आए हो?’ उस लड़के ने जवाब दिया कि वह भी काम की तलाश में आया है।

जब शंकरजी ने उससे पूछा कि वह क्या करता है, तो जयकिशन ने कहा कि वह हारमोनियम बजाते हैं। बस यहीं से दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई और फिर दोस्ती हो गई। उस समय शंकरजी पृथ्वी थिएटर में तबला बजाया करते थे। उन्होंने जयकिशन को पृथ्वीराज कपूर के पास ले जाकर कहा, “पापाजी, यह बहुत अच्छा लड़का है, इसे काम दे दीजिए।” इसके बाद दोनों साथ काम करने लगें।

मनोज मुंतशिर ने आगे बताया कि इसी दौरान उनकी मुलाकात राज कपूर से हुई। उस समय राज कपूर अपनी दूसरी फिल्म बना रहे थे। उनकी पहली फिल्म आग का संगीत राम गांगुली ने दिया था और कुछ समय तक शंकर-जयकिशन उनके असिस्टेंट भी रहे। बाद में राज कपूर ने अपनी दूसरी फिल्म का संगीत देने का मौका इस नई जोड़ी को दे दिया। यहीं से हिंदी सिनेमा को मिला एक ऐसा संगीतकार जोड़ा, जिसने आने वाले कई दशकों तक संगीत की दुनिया पर राज किया।

मनोज मुंतशिर ने कहा कि जिस जोड़ी की शुरुआत पृथ्वी थिएटर से हुई थी, बाद में उनके गानों को सुनने के लिए सिनेमाघरों के बाहर लंबी-लंबी लाइनें लगने लगीं। उनके गानों में ऐसा जादू था कि लोग आज भी उन्हें सुनकर पुराने दौर में खो जाते हैं।

शंकर-जयकिशन ने 50, 60 और 70 के दशक में हिंदी सिनेमा को कई यादगार गाने दिए। आवारा का मशहूर गीत ‘आवारा हूं’, श्री 420 का ‘प्यार हुआ इकरार हुआ’, संगम का ‘ये मेरा प्रेम पत्र’ और सूरज का ‘बहारों फूल बरसाओ’ जैसे गीत आज भी सदाबहार माने जाते हैं। उनकी धुनों में प्यार, दर्द, खुशी और जिंदगी का हर रंग महसूस होता था।

Leave feedback about this

  • Service