May 14, 2026
National

असम यूसीसी बहस: गौरव गोगोई ने भाजपा की समानता के प्रति प्रतिबद्धता पर सवाल उठाए

Assam UCC debate: Gaurav Gogoi questions BJP’s commitment to equality

14 मई । असम कांग्रेस अध्यक्ष और लोकसभा सांसद गौरव गोगोई ने बुधवार को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ पार्टी समानता और न्याय को बढ़ावा देने के बजाय राजनीतिक ध्रुवीकरण के लिए संवैधानिक प्रावधान का उपयोग कर रही है।

पत्रकारों से बात करते हुए गोगोई ने भारतीय जनता पार्टी की नागरिकों के लिए समान अधिकारों और समान व्यवहार के प्रति प्रतिबद्धता पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि पार्टी वास्तव में शासन या सामाजिक न्याय में “एकसमानता” में विश्वास नहीं करती है।

कांग्रेस नेता ने कहा, “क्या भारतीय जनता पार्टी समानता में विश्वास करती है? क्या भारतीय जनता पार्टी भारत के सभी नागरिकों का सम्मान करती है? क्या भारतीय जनता पार्टी नागरिकों को समान अधिकार और समान सुरक्षा प्रदान करती है? सच्चाई यह है कि भारतीय जनता पार्टी समान अधिकारों, समान सम्मान या समानता में विश्वास नहीं करती है।”

राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांतों के तहत समान नागरिक संहिता के संवैधानिक उल्लेख का हवाला देते हुए गोगोई ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी विभाजनकारी राजनीतिक उद्देश्यों के लिए एक संवैधानिक अवधारणा का दुरुपयोग करने का प्रयास कर रही है।

उन्होंने कहा, “यद्यपि समान नागरिक संहिता का उल्लेख संविधान के निर्देशक सिद्धांतों में है, फिर भी भारतीय जनता पार्टी समाज में विभाजन और ध्रुवीकरण की अपनी राजनीति को बढ़ावा देने के लिए इस संवैधानिक विचार का दुरुपयोग करना चाहती है।”

गोगोई ने कहा, “भारतीय जनता पार्टी विभिन्न राज्यों में समान नागरिक संहिता की बात सामाजिक विभाजन और राजनीतिक ध्रुवीकरण के नजरिए से करती है। सद्भाव और समान अवसर पैदा करने के बजाय, पार्टी इस मुद्दे का इस्तेमाल समुदायों को बांटने के लिए कर रही है।”

उनकी ये टिप्पणियां असम समेत भारतीय जनता पार्टी शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता के कार्यान्वयन पर नए सिरे से शुरू हुई चर्चाओं के बीच आईं, जहां राज्य सरकार ने हाल ही में संकेत दिया है कि उसने इस मामले पर प्रारंभिक कार्य शुरू कर दिया है।

भारतीय जनता पार्टी लगातार यह कहती रही है कि समान नागरिक संहिता का उद्देश्य धर्म की परवाह किए बिना सभी नागरिकों के लिए समान कानून सुनिश्चित करना है और यह समानता और न्याय की संवैधानिक परिकल्पना के अनुरूप है।

हालांकि, विपक्षी दलों ने सत्ताधारी पार्टी पर चुनावी लाभ के लिए इस मुद्दे का इस्तेमाल करने और अल्पसंख्यक समुदायों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है।

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बुधवार को घोषणा की कि असम विधानसभा का आगामी सत्र 21 मई से शुरू होगा और राज्य सरकार 25 मई को सदन में समान नागरिक संहिता विधेयक पेश करेगी।

गुवाहाटी के कोइनाधारा में आयोजित अपनी दूसरी सरकार की पहली कैबिनेट बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए सरमा ने कहा कि राज्य में आदिवासी समुदाय प्रस्तावित समान नागरिक संहिता विधेयक के दायरे से बाहर रहेंगे।

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