May 16, 2026
National

भोजशाला पर कोर्ट के फैसले को भाजपा नेताओं ने बताया सनातन धर्म की जीत, विपक्ष ने जताई आपत्ति

BJP leaders hail court’s Bhojshala verdict as victory for Sanatan Dharma, opposition objects

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के भोजशाला–कमल मौला मस्जिद परिसर को लेकर आए हालिया फैसले के बाद देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। एक तरफ भाजपा नेता इसे सनातन धर्म की जीत बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ विपक्ष इसे गलत बता रहा है। वहीं, इस बीच मुस्लिम पक्ष द्वारा मामले को सुप्रीम कोर्ट में भी ले जाने की बात कही जा रही है।

भाजपा विधायक सी.पी. सिंह ने कहा कि धार स्थित भोजशाला का विवाद बहुत पुराना है। यह स्थान राजा भोज के समय से जुड़ा हुआ माना जाता है। उनके अनुसार, मुगल काल में कई मंदिरों और सांस्कृतिक स्थलों के स्वरूप बदल दिए गए थे और भोजशाला भी उसी का हिस्सा रही होगी। उन्होंने कहा कि अब जब मामला कोर्ट में गया, तो कोर्ट ने कहा कि यह एक हिंदू मंदिर है और वहां पूजा करने का अधिकार है। यह ऐतिहासिक मंदिर है लेकिन मुसलमान इसे मान नहीं रहे हैं।

बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अजय आलोक ने भी इसे एक ऐतिहासिक निर्णय बताया है। उनका कहना है कि अब मुस्लिम पक्ष को ‘गंगा-जमुनी तहजीब’ को स्वीकार करते हुए इस फैसले का पालन करना चाहिए। भाजपा की एक अन्य नेता केतकी सिंह ने इस फैसले को सीधे तौर पर “सनातन की जीत” बताया है। उनके अनुसार यह लंबे संघर्ष का परिणाम है और अदालत का निर्णय सही दिशा में आया है।

शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने भी इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला करोड़ों हिंदू भक्तों की भावनाओं को ध्यान में रखकर आया है और वे इसके लिए अदालत के आभारी हैं। उन्होंने कहा कि अयोध्या राम मंदिर फैसले के समय भी उनकी पार्टी ने खुशी मनाई थी और अब मथुरा जन्मभूमि विवाद पर भी इसी तरह के फैसले की उम्मीद जताई जा रही है।

वहीं, कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि ऐसे मुद्दों को बार-बार उठाकर असली समस्याओं से ध्यान भटकाया जा रहा है। उनके अनुसार देश में बेरोजगारी, महंगाई, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे बड़े मुद्दे हैं, लेकिन चर्चा बार-बार धार्मिक विवादों पर आकर अटक जाती है।

टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि देश में कुछ सरकारें लगातार ऐसे कदम उठा रही हैं जो उनके अनुसार एक खास धार्मिक एजेंडे को आगे बढ़ाते हैं। उन्होंने अदालतों की भूमिका पर भी सवाल उठाए और कहा कि पहले बाबरी मस्जिद मामले जैसे फैसलों में भी वे असहमत रहे हैं।

जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष मलिक मोतसिम खान ने कहा, “वहां की कमेटी सुप्रीम कोर्ट जाएगी और हम उसे अपना मोरल सपोर्ट देंगे। वहां के स्थानीय लोग और कमाल मौला मस्जिद की कमेटियां सुप्रीम कोर्ट जाएंगी लेकिन सवाल यह है कि देश में कौन किस मस्जिद के खिलाफ जाएगा? देश की ज्यूडिशियरी ने ऐसा माहौल बना दिया है कि अब हर गांव में कुछ लोग खड़े होकर हर मस्जिद को मंदिर बताने लगेंगे और फिर ज्यूडिशियरी फैसले सुनाती रहेगी। यही असली मुद्दा है।

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