May 18, 2026
Entertainment General News

कुमुद मिश्रा के कारण अंशुमन पुष्कर ने ‘सतरंगी’ को कहा ‘हां’, बोले- उनके साथ काम करना पाठशाला जैसा

Anshuman Pushkar said yes to ‘Satrangi’ because of Kumud Mishra, says working with her was like school

अभिनेता अंशुमान पुष्कर आगामी क्राइम-रिवेंज थ्रिलर सीरीज ‘सतरंगी– बदले का खेल’ में बबलू महतो और लल्ली की दोहरी भूमिका निभा रहे हैं। अभिनेता का कहना है कि इस सीरीज में अभिनेता कुमुद मिश्रा की मौजूदगी की वजह से ही उन्होंने हामी भरी थी।

सीरीज में अंशुमन के साथ अभिनेता कुमुद मिश्रा भी नजर आएंगे। उनके साथ काम करने पर अंशुमन ने बताया, “जब मेरे पास इस प्रोजेक्ट का ऑफर आया था, तो मेरे हां कहने की सबसे बड़ी वजह ही कुमुद थे। मेरा खुद का बैकग्राउंड भी थिएटर से रहा है, और मैं सालों से कुमुद के काम का बड़ा प्रशंसक रहा हूं। उनके साथ सेट पर काम करना ही मेरे लिए एक पाठशाला है, जहां मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला है।”

अभिनेता ने कुमुद मिश्रा की तारीफ करते हुए बताया कि वे एक बेहतरीन कलाकार होने के साथ-साथ दरियादिल इंसान भी हैं। उनके साथ काम करने के दौरान ऐसा लग रहा था कि किसी खूबसूरत सफर का आनंद ले रहा हूं।

अभिनेता ने आईएएनएस के साथ खास बातचीत में अपने किरदार के बारे में खुलकर बात की। जब आईएएनएस ने पूछा, “क्या दर्शक इस सीरीज के दर्द को महसूस कर पाएंगे तो अभिनेता ने बहुत ही सकारात्मक जवाब दिया। अभिनेता ने कहा, “मुझे पूरी उम्मीद है कि दर्शक इस कहानी से भावनात्मक रूप से जरूर जुड़ेंगे, क्योंकि इसमें जिस तरह की परिस्थितियां और घटनाएं दिखाई गई हैं, वे हमारी असल जिंदगी से जुड़ी है। अगर दर्शक इन सच्चाइयों को महसूस कर पाते तो जरूर कनेक्ट कर पाएंगे।

बातचीत के दौरान अंशुमन ने उत्तर प्रदेश और बिहार में चल रहे लौंडा नाच पर समाज के नजरिए पर बात की। उन्होंने कहा, “यह बेहद दुखद है कि लौंडा नाच करने वाले को आज भी वह इज्जत नहीं मिलती। उन्हें अक्सर कलाकार मानने के बजाय अश्लील मनोरंजन करने वाला समझा जाता है, लेकिन उनकी जिंदगी बहुत मुश्किल होती है। उनमें से कई लोग ऐसे आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े तबकों से आते हैं, जहां जिंदगी गुजारना ही अपने आप में एक संघर्ष है। अगर इस कला को सही पहचान और इज्जत मिली होती तो लोग इसे बिल्कुल अलग नजरिए से देखते।”

आईएएनएस ने जब अंशुमन से पूछा कि क्या एक अभिनेता के तौर पर उनके लिए भी एक्टिंग और असलियत के बीच अंतर खत्म हुआ, तो उन्होंने कहा, “असल में एक एक्टर के लिए यह सबसे बेहतरीन एहसास होता है। जब आप किसी किरदार को पूरी ईमानदारी से निभाते हैं तो आपके और उस किरदार के बीच की सीमाएं धुंधली होने लगती हैं।”

Leave feedback about this

  • Service