तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में चुने गए पार्टी के 80 विधायकों के साथ एक बैठक बुलाई। बैठक का उद्देश्य मुख्य विपक्षी दल के तौर पर काम करने की रणनीति पर चर्चा करना और उसे अपनाना है।
टीएमसी महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी भी इस बैठक में मौजूद रहेंगे।
वर्तमान विधानसभा के एक पार्टी सदस्य ने, अपनी पहचान गुप्त रखने की सख्त शर्त पर बताया कि एजेंडे में शामिल प्रमुख मुद्दों में से एक यह है कि उस स्थिति से कैसे निपटा जाए, जब राज्य के विभिन्न नागरिक निकायों का राजनीतिक प्रशासन, जो अभी भी तृणमूल कांग्रेस के नियंत्रण में है, बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों में नौकरशाही की अवहेलना का सामना कर रहा है।
यह बैठक कोलकाता नगर निगम (केएमसी) के अधिकारियों के साथ चल रहे घटनाक्रम के बीच बुलाई गई है। केएमसी में अभी भी वर्तमान और चार बार के तृणमूल कांग्रेस सदस्य तथा ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पिछली कैबिनेट के पूर्व सदस्य, फिरहाद हकीम ही मेयर हैं। केएमसी अधिकारियों ने केएमसी अधिनियम 1980 की धारा 400(1) के तहत नोटिस जारी किए हैं, जो कथित तौर पर अवैध निर्माणों के मालिकों को नागरिक अधिकारियों के सामने पेश होने और अपना पक्ष रखने का अवसर प्रदान करती है।
केएमसी के अधिकार क्षेत्र में आने वाले इलाकों में अभिषेक बनर्जी के स्वामित्व वाली 17 संपत्तियों को नोटिस जारी किए गए हैं, और इन संपत्तियों की दीवारों पर नोटिस की प्रतियां चिपका दी गई हैं।
संयोग से केएमसी अधिकारियों ने ये नोटिस तब जारी किए, जब मौजूदा मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने पिछले हफ्ते दक्षिण 24 परगना जिले के फलता में एक सभा को संबोधित करते हुए, एक ऐसी कॉर्पोरेट संस्था से जुड़ी संपत्तियों की जांच के संकेत दिए थे, जिसके बारे में कहा जाता है कि वह अभिषेक बनर्जी के स्वामित्व में है।
हालांकि, इस ओर इशारा करते हुए भी मुख्यमंत्री ने बनर्जी का सीधे तौर पर नाम लेने से परहेज किया और इसके बजाय उन्हें ‘मिस्टर नेफ्यू’ कहकर संबोधित किया। बैठक में अधिकारी ने यह भी कहा कि वह केएमसी से ‘मिस्टर नेफ्यू’ की एक कंपनी के स्वामित्व वाली 24 संपत्तियों की सूची लेकर आए हैं।
सोमवार को भी मुख्यमंत्री ने यह याद दिलाया कि उनके नेतृत्व वाली नई कैबिनेट, पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौरान भ्रष्टाचार और जनता के पैसे की लूट में शामिल हर व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने के लिए दृढ़ संकल्पित है।
बता दें कि सोमवार को मुख्यमंत्री ने दो अलग-अलग जांच आयोगों के गठन की घोषणा की। इन दोनों आयोगों की अध्यक्षता कलकत्ता हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज करेंगे और ये संस्थागत भ्रष्टाचार और महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों की जांच करेंगे।
सोमवार दोपहर मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “ये दोनों जांच आयोग जून से काम करना शुरू कर देंगे। कलकत्ता हाई कोर्ट के जस्टिस बिस्वजीत बसु (रिटायर्ड) ‘संस्थागत भ्रष्टाचार’ के मामलों की जांच करने वाली समिति की अध्यक्षता करेंगे। वहीं, ‘महिलाओं के खिलाफ अपराध’ के मामलों की जांच करने वाली समिति की अध्यक्षता जस्टिस समाप्ति चट्टोपाध्याय करेंगी।”


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