May 22, 2026
National

उच्च न्यायालय गए याचिकाकर्ता अख्रुज्जमान बोले- हमने कुर्बानी को लेकर मांग की

Petitioner Akhruzzaman, who went to the High Court, said – we made a demand regarding the sacrifice

कुर्बानी को लेकर उच्च न्यायालय पहुंचे याचिकाकर्ता अख्रुज्जमान ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि हम लोगों का साल में एक बार कुर्बानी का त्योहार आता है। हम लोग घर पर जानवरों का पालन-पोषण करते हैं और उनकी कुर्बानी देते हैं। लेकिन बंगाल सरकार की ओर से एक नोटिफिकेशन जारी किया गया, जिसमें कहा गया कि 1950 के अधिनियम और उच्च न्यायालय के फैसले का पालन करना होगा।

अख्रुज्जमान ने कहा कि 14 वर्ष से अधिक उम्र के पशुओं की मेडिकल जांच के बाद सर्टिफिकेट मिलने पर ही कुर्बानी दी जा सकेगी। हमारा कहना है कि 13 मई को सरकार की ओर से जो नोटिस जारी किया गया था, उसके बाद हमने बंगाल सरकार को पत्र लिखा। उसमें कहा कि 1950 के अधिनियम की धारा 12 में एक प्रावधान है, जिसके तहत धार्मिक उद्देश्यों और कुछ विशेष मामलों में सरकार छूट दे सकती है।

अख्रुज्जमान ने कहा कि जब सरकार ने हमारे पत्र पर संज्ञान नहीं लिया तो हमने उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच में याचिका दायर कर मांग की कि कुर्बानी की अनुमति दी जाए। टीएमसी नेता कुणाल घोष ने कुर्बानी को लेकर उच्च न्यायालय के फैसले पर आईएएनएस से बातचीत में कहा कि हर किसी को अपने धर्म का पूरी तरह पालन करने का अधिकार है। देश का संविधान इसकी इजाजत देता है।

कुणाल घोष ने कहा कि भाजपा की नीति समझ नहीं आती। कुर्बानी को लेकर राज्य सरकार ने कुछ निर्देश दिए हैं, लेकिन दूसरी ओर इन्हीं चीजों का एक्सपोर्ट किया जा रहा है। केंद्र सरकार विदेशी मुद्रा अर्जित करने के लिए एक्सपोर्ट कर रही है। बंगाल में इस पर रोक लगाई जा रही है, जबकि दिल्ली से इसका एक्सपोर्ट हो रहा है।

उन्होंने कहा कि अख्रुज्जमान ने एक याचिका दायर कर उच्च न्यायालय में अपील की थी। बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950 का हवाला देते हुए कुणाल घोष ने कहा कि राज्य सरकार इसमें शिथिलता दे सकती है। हमने छूट देने की बात कही है, कानून को चुनौती नहीं दी है।

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