हरियाणा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, यमुनानगर ने गेहूं की पराली जलाने के मामलों में छह किसानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है।
विभाग ने सरकारी पोर्टल ‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ पर उल्लंघनकर्ताओं के भूमि अभिलेख में ‘लाल प्रविष्टियाँ’ दर्ज कर दी हैं, जिसके तहत उन्हें अगले दो फसल मौसमों तक अनाज मंडियों में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अपनी फसलें बेचने से रोक दिया गया है। उल्लंघनकर्ताओं पर 20,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, हरियाणा अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (HARSAC) से प्राप्त रिपोर्टों के आधार पर, विभाग को इस वर्ष आग लगने की घटनाओं के संबंध में 19 सूचनाएं प्राप्त हुईं। इन 19 सूचनाओं में से पांच मामले झूठी सूचनाएँ थीं, जबकि सात दुर्घटनाएँ थीं।
विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पिछले साल जिले को इस तरह की 36 सूचनाएं मिली थीं, जिनमें से 18 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई और 55,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया।
यमुनानगर के कृषि उप निदेशक डॉ. आदित्य प्रताप डबास ने कहा कि पोर्टल पर जिन किसानों को रेड एंट्री दी गई है, वे अगले दो फसल सीजन तक अनाज मंडियों में अपनी फसलें एमएसपी पर नहीं बेच पाएंगे।
डॉ. डबास ने कहा, “अनाज मंडियों में फसल के साथ प्रवेश ‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ पोर्टल से जुड़ा हुआ है और जिन किसानों की प्रविष्टियां लाल रंग की होंगी, उन्हें प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा।” उन्होंने आगे कहा कि विभाग किसानों के बीच फसल अवशेषों को न जलाने और इसके बजाय वैज्ञानिक तरीके से उनका प्रबंधन करने के लिए लगातार जागरूकता फैला रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरता कम होती है और उसमें मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते हैं। उन्होंने कहा, “फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करने से मिट्टी का स्वास्थ्य बेहतर होगा और वायु प्रदूषण कम होगा।”
उन्होंने किसानों से अपील की कि वे पराली जलाने से बचें और बेहतर फसल उत्पादकता और पर्यावरण संरक्षण के लिए टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाएं।


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