July 3, 2026
Punjab

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के ऐलान के 24 घंटों के भीतर पंजाब सरकार द्वारा निजी स्कूलों द्वारा मनमाने तरीके से फीस वृद्धि पर रोक लगाने के लिए कानून का मसौदा तैयार करने के आदेश

Within 24 hours of Chief Minister Bhagwant Singh Mann’s announcement, the Punjab government has been ordered to draft a law to curb arbitrary fee hikes by private schools.

अनिल भारद्वाज

चंडीगढ़ 4 जून | मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान द्वारा निजी स्कूलों द्वारा मनमाने ढंग से फीस वृद्धि को रोकने के लिए व्यापक सुधारों की घोषणा के 24 घंटों से भी कम समय में पंजाब सरकार ने इस निर्णय को कानून का रूप देने के लिए तेजी से कदम उठाए हैं। स्कूल शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को पत्र लिखकर तुरंत कानून का मसौदा तैयार करने के निर्देश दिए हैं, ताकि निजी स्कूलों की फीस को नियमित किया जा सके और पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके। इससे 32 लाख से अधिक विद्यार्थियों और उनके परिवारों को अनुचित आर्थिक बोझ से राहत मिलेगी।

यह प्रस्तावित कानून वार्षिक फीस वृद्धि को 5 प्रतिशत तक सीमित करेगा और पिछले तीन वर्षों में निर्धारित 15 प्रतिशत सीमा से अधिक फीस बढ़ाने वाले स्कूलों को विद्यार्थियों के अभिभावकों से ली गई अतिरिक्त राशि वापस करनी होगी। यह कदम पंजाब सरकार द्वारा शिक्षा क्षेत्र में मुनाफाखोरी को रोकने और यह सुनिश्चित करने के लिए एक निर्णायक पहल है कि निजी स्कूल व्यावसायिक लाभ की बजाय विद्यार्थियों और अभिभावकों के हित में कार्य करें।

अपने निर्देशों में स्कूल शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा, “सुलभ और किफायती शिक्षा प्रदान करना हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। इस समय पंजाब भर के लगभग 7,800 निजी स्कूलों में 32 लाख से अधिक विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। ये विद्यार्थी और उनके परिवार मनमाने तरीके से फीस वृद्धि के खिलाफ मजबूत सुरक्षा और इन संस्थानों के कामकाज में पूर्ण पारदर्शिता के हकदार हैं।”

शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में मुनाफाखोरी को सख्ती से रोकने के लिए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में यह निर्णय लिया गया है। शिक्षा एक पवित्र और जनकल्याणकारी कार्य है, न कि कोई व्यापारिक गतिविधि जिसे लाभ कमाने के लिए चलाया जाए।

उन्होंने आगे कहा कि इस सिद्धांत को भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने भी समर्थन दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कई बार यह स्पष्ट किया है कि निजी संस्थानों को उचित फीस लेने का अधिकार है, लेकिन शिक्षा क्षेत्र में व्यावसायीकरण और अत्यधिक मुनाफाखोरी स्वीकार्य नहीं है।

शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा, “नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए सरकार एक ऐसा विधायी ढांचा लाएगी जिससे निजी संस्थानों की जवाबदेही सुनिश्चित होगी और मनमानी फीस वृद्धि पर रोक लगेगी। इस मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है और विभाग को जल्द से जल्द कैबिनेट के विचार हेतु एक व्यापक प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।”

प्रस्तावित कानून के तहत पंजाब सरकार निजी स्कूलों के लिए एक सख्त वार्षिक फीस सीमा लागू करेगी। नए ढांचे के अनुसार निजी स्कूलों को एक वर्ष में 5 प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ाने की अनुमति नहीं होगी।

यह कानून अभिभावकों को पूर्वव्यापी राहत भी प्रदान करेगा। कोई भी निजी स्कूल जिसने लगातार पिछले तीन वर्षों में निर्धारित सीमा 15 प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ाई है, उसे कानूनी रूप से अतिरिक्त ली गई फीस अभिभावकों को वापस करनी होगी।

भगवंत मान सरकार का मानना है कि शिक्षा हर बच्चे के लिए सुलभ और किफायती होनी चाहिए तथा अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ना चाहिए। इस प्रस्तावित कानून से पूरे पंजाब में निजी स्कूलों के लिए एक पारदर्शी और जवाबदेह नियामक ढांचा स्थापित होने की उम्मीद है।

कांग्रेस सरकार ने निजी स्कूलों को फीस बढ़ाने की छूट दी थी

2019 में कांग्रेस सरकार ने ऐसे प्रावधान लागू किए थे जिनके तहत निजी स्कूलों को फीस बढ़ाने की छूट मिल गई थी। स्कूलों को केवल नोटिस बोर्ड और वेबसाइटों पर संशोधित फीस की जानकारी प्रदर्शित करने के बाद फीस ढांचे में बदलाव की अनुमति दी गई थी, जिसमें नियामक निगरानी बहुत कम थी। इससे मनमानी फीस वृद्धि का रास्ता खुल गया और पूरे पंजाब में अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ता गया।

भगवंत मान सरकार द्वारा लाए जाने वाले नए कानून का उद्देश्य इस व्यवस्था को समाप्त करना, निजी स्कूलों की जवाबदेही सुनिश्चित करना और विद्यार्थियों तथा अभिभावकों को अतिरिक्त फीस के बोझ से राहत देना है।

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