June 11, 2026
Entertainment

‘फूल और कांटे’ में छेड़छाड़ को प्यार समझा गया था, आज ऐसा करने वाला जेल पहुंच जाएगा: मधु

In ‘Phool Aur Kaante’, pestering was mistaken for love; today, anyone doing that would end up in jail: Madhoo.

फिल्मों में महिलाओं को किस तरह दिखाया जाता है, यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। हाल ही में अभिनेता राम चरण की फिल्म ‘पेड्डी’ में जान्हवी कपूर को जिस तरह दिखाया गया, उसे लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई।

इसी बहस के बीच 90 के दशक की लोकप्रिय अभिनेत्री मधु ने फिल्मों में महिलाओं की प्रस्तुति और बदलते समय को लेकर खुलकर अपनी राय रखी है। आईएएनएस को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि सिनेमा हमेशा समाज का आईना होता है और समाज के बदलने के साथ फिल्मों को भी बदलना पड़ता है।

आईएएनएस संग खास बातचीत में मधु ने कहा, ”आज जिन चीजों को गलत माना जाता है, कभी वही चीजें फिल्मों में सामान्य और रोमांटिक समझी जाती थीं। मेरी सुपरहिट फिल्म ‘फूल और कांटे’ में जो दिखाया गया था, उसे उस समय लोगों ने प्यार और रोमांस माना था, लेकिन आज के दौर में वही व्यवहार छेड़छाड़ और उत्पीड़न माना जाएगा।”

मधु से आईएएनएस ने जब पूछा कि क्या आज की फिल्मों में महिलाओं को महज एक वस्तू के तौर पर दिखाया जाता है, तो उन्होंने कहा, ”यह सवाल केवल फिल्मों का नहीं, बल्कि समाज की सोच का भी है। फिल्मों की कहानियां और किरदार उसी तरह बदलते हैं जैसे लोगों की सोच बदलती है। अगर समाज किसी चीज को स्वीकार नहीं करता, तो धीरे-धीरे वह फिल्मों से भी गायब होने लगती है।”

अभिनेत्री ने कहा, “80 और 90 के दशक की फिल्मों में रेप सीन बहुत आम बात हुआ करते थे। लगभग हर दूसरी फिल्म में ऐसे सीन देखने को मिल जाते थे। उस दौर में इन सीन्स को लेकर ज्यादा सवाल नहीं उठाए जाते थे और न ही दर्शकों के बीच कोई बड़ी बहस होती थी। लेकिन आज का समय पूरी तरह बदल चुका है और अब ऐसे सीन्स को पहले की तरह स्वीकार नहीं किया जाता।”

उन्होंने कहा, ”आज अगर किसी फिल्म में ऐसी घटना दिखाई भी जाती है, तो उसे बहुत सावधानी के साथ पेश किया जाता है। अब फिल्मकार इस बात का ध्यान रखते हैं कि किसी गंभीर विषय को दिखाते समय गलत संदेश न जाए।”

मधु ने अपनी फिल्म ‘फूल और कांटे’ का जिक्र करते हुए कहा, ”फिल्म के शुरुआती गानों में हीरो और उसके दोस्त कॉलेज में लड़की का पीछा करते हैं, उसे परेशान करते हैं और सीटियां बजाते हैं। उस समय इन सीन्स को रोमांस का हिस्सा माना गया था, लेकिन अगर आज ऐसा कुछ होता, तो वह लड़का जेल में होता।”

उन्होंने कहा, ”फिल्म में मेरा किरदार आखिरकार उसी लड़के से प्यार करने लगता है, जो उसे लगातार परेशान करता है। उस दौर में इसे प्रेम कहानी माना गया, लेकिन आज अगर कोई लड़का कॉलेज या किसी सार्वजनिक जगह पर किसी लड़की के साथ ऐसा व्यवहार करे, तो उसे गलत माना जाएगा। आज के लोग इसे छेड़छाड़ कहेंगे और उसे जेल में डाल देंगे।”

मधु ने कहा, ”उस समय किसी ने यह नहीं कहा कि फिल्म छेड़छाड़ को बढ़ावा दे रही है। उल्टा दर्शकों ने फिल्म को खूब प्यार दिया और यह बड़ी हिट फिल्म बन गई। लेकिन आज का दर्शक पहले से ज्यादा जागरूक है और वह ऐसी चीजों पर सवाल उठाता है।”

मधु ने अपने बयान में कहा, ”सिनेमा हमेशा समाज की सोच को दिखाता है। जैसे-जैसे समाज बदलता है, वैसे-वैसे फिल्मों की कहानियां, किरदार और उन्हें दिखाने का तरीका भी बदलता है। आज लोगों के बीच महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों को लेकर अधिक जागरूकता है, इसलिए फिल्मों को भी उसी सोच के साथ आगे बढ़ना होगा।”

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