June 11, 2026
Entertainment

पीएम मोदी ने दी भारतीराजा को श्रद्धांजलि, ‘उनके काम ने तमिल सिनेमा को नई पहचान दी’

PM Modi pays tribute to Bharathiraja; ‘His work gave Tamil cinema a new identity’

तमिल सिनेमा के दिग्गज निर्देशक, निर्माता और पटकथा लेखक भारतीराजा के निधन से पूरे देश में शोक की लहर है। फिल्म जगत से लेकर राजनीति जगत तक कई बड़ी हस्तियां उन्हें श्रद्धांजलि दे रही हैं। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी गुरुवार को उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक भावुक पोस्ट करते हुए भारतीराजा के योगदान को याद किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पोस्ट में लिखा, “थिरु भारतीराजा का निधन बेहद दुखद है। वह सिनेमा की दुनिया का एक बड़ा नाम थे, जिनके काम ने तमिल सिनेमा को नई पहचान दी। खास तौर पर, उन्होंने ग्रामीण जीवन को सच्चाई के साथ पर्दे पर उतारा।” पीएम मोदी ने आगे लिखा, ”इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं। उनके परिवार और चाहने वालों के साथ हैं। ओम शांति।”

बता दें कि भारतीराजा का बुधवार को चेन्नई में निधन हो गया। वह 84 वर्ष के थे और लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। पिछले कुछ समय से उनका इलाज चेन्नई के एक निजी अस्पताल में चल रहा था।

भारतीराजा का निजी जीवन भी पिछले कुछ सालों में काफी कठिन दौर से गुजरा था। साल 2024 में उनके बेटे और अभिनेता मनोज भारतीराजा का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था। उस समय उनकी उम्र केवल 48 वर्ष थी। बेटे की अचानक मौत ने भारतीराजा को अंदर तक झकझोर दिया था। इसके बाद उनकी सेहत लगातार गिरती चली गई। पिछले साल दिसंबर में भी सांस लेने में परेशानी के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

भारतीराजा के करियर की बात करें, तो साल 1977 में आई उनकी पहली फिल्म ’16 वयथिनिले’ ने तमिल सिनेमा में नई क्रांति ला दी। इस फिल्म में रजनीकांत, कमल हासन और श्रीदेवी जैसे कलाकार नजर आए थे। पहली ही फिल्म ने उन्हें सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार दिलाया और वह रातोंरात चर्चित फिल्मकार बन गए। इसके बाद उन्होंने ‘किझाके पोगम रेल’, ‘सिगप्पु रोजक्कल’, ‘अलाइगल ओइवथिल्लई’, ‘कादल ओवियम’, ‘मुधल मरियाथाई’, ‘करुथम्मा’ और ‘मन वासनाई’ जैसी कई यादगार फिल्में दीं।

भारतीराजा को सबसे ज्यादा पहचान गांवों की कहानियों को बड़े पर्दे पर जीवंत करने के लिए मिली। उन्होंने अपनी फिल्मों में ग्रामीण जीवन की सादगी, संघर्ष, प्रेम और सामाजिक मुद्दों को बेहद प्रभावशाली ढंग से दिखाया। उन्होंने अपने लंबे करियर में लगभग 44 फिल्मों का निर्देशन किया और छह राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों सहित कई बड़े सम्मान अपने नाम किए।

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