13 जून । मध्य भारत क्षेत्र (भारतीय सेना) ने बाढ़ जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए अपनी तैयारियों को और मजबूत करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में व्यापक बाढ़ राहत और आपदा प्रतिक्रिया मॉक ड्रिल आयोजित की। वीआईपी घाट, संगम क्षेत्र, किला घाट समेत कई संवेदनशील स्थानों पर यह अभ्यास किया गया।
इस मॉक ड्रिल में आपदा प्रबंधन के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं को परखा गया। इसमें बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से लोगों का बचाव, घायलों को सुरक्षित निकालना, चिकित्सा सहायता प्रदान करना, राहत सामग्री का त्वरित वितरण और नागरिक प्रशासन, स्थानीय पुलिस, एसडीआरएफ और अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करने जैसे कार्य शामिल थे। वास्तविक आपदा जैसी स्थिति का अनुकरण करते हुए सेना के जवानों ने इन सभी गतिविधियों का अभ्यास किया।
मॉक ड्रिल के दौरान तेज प्रतिक्रिया, संसाधनों की प्रभावी तैनाती और प्रभावित नागरिकों तक समय पर मदद पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया गया। सेना की टीमों ने नावों, मेडिकल वैन, राहत सामग्री और संचार उपकरणों का उपयोग कर वास्तविक परिस्थितियों में काम करने का अभ्यास किया। इस दौरान विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की भी परीक्षा ली गई।
भारतीय सेना के मध्य भारत क्षेत्र ने इस अभ्यास के जरिए स्पष्ट संदेश दिया है कि प्राकृतिक आपदाओं और मानवीय संकट की किसी भी स्थिति में सेना देश की जनता के साथ पूरी तत्परता से खड़ी रहेगी। ऐसे अभ्यास न केवल सेना की ऑपरेशनल तैयारियों को मजबूत करते हैं, बल्कि नागरिक प्रशासन के साथ बेहतर तालमेल और विश्वास भी बढ़ाते हैं।
सेना के अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के नियमित मॉक ड्रिल से जवानों की क्षमता बढ़ती है और आपदा आने पर प्रतिक्रिया टीमें तेजी, सटीकता और संवेदनशीलता के साथ काम कर पाती हैं। प्रयागराज जैसे बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में यह अभ्यास इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां हर वर्ष मानसून के दौरान गंगा और यमुना नदियों में जल स्तर बढ़ने से बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।


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