June 15, 2026
Entertainment

जब शूटिंग देखने पहुंचीं सुरैया को निर्देशक ने देखते ही दे दिया रोल, इस तरह शुरू हुआ सुपरस्टार बनने का सफर

The director offered Suraiya a role the moment he saw her when she arrived to watch the shoot; that is how her journey to becoming a superstar began.

हिंदी सिनेमा की मशहूर अदाकारा सुरैया ने अपनी खूबसूरती, दमदार अभिनय और मधुर आवाज से लाखों लोगों के दिलों पर राज किया है। एक दौर ऐसा था जब उनकी लोकप्रियता किसी बड़े सुपरस्टार से कम नहीं थी। दिलचस्प बात यह है कि सुरैया का फिल्मों में आने का सपना नहीं था, लेकिन एक फिल्म की शूटिंग देखने के लिए वह सेट पर पहुंची और यहीं से उन्हें अपने करियर की शुरुआत मिली।

सुरैया का जन्म 15 जून 1929 को लाहौर में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है। उनका पूरा नाम सुरैया जमाल शेख था। जब वह सिर्फ एक साल की थीं, तब उनका परिवार मुंबई आकर बस गया। उनके मामा एम. जहूर फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े हुएथे;, ऐसे में उन्हें बचपन से ही फिल्मी माहौल देखने का मौका मिला। बहुत छोटी उम्र में ही उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो के बच्चों के कार्यक्रम में गाना शुरू कर दिया था। उनकी मधुर आवाज लोगों को पसंद आती थी।

सुरैया के जीवन का सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब वह अपने मामा के साथ फिल्म ‘ताजमहल’ की शूटिंग देखने मोहन स्टूडियो पहुंचीं। वह सिर्फ शूटिंग देखने गई थीं, लेकिन वहां मौजूद निर्देशक नानूभाई वकील की नजर उन पर पड़ गई। सुरैया की मासूमियत, सादगी और आकर्षक व्यक्तित्व ने निर्देशक को इतना प्रभावित किया कि उन्होंने तुरंत उन्हें फिल्म में मुमताज महल का किरदार दे दिया। यह मौका किसी सपने से कम नहीं था। यहीं से सुरैया के फिल्मी करियर की असली शुरुआत हुई और उन्होंने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

अभिनय के साथ-साथ सुरैया की गायकी भी लोगों को खूब पसंद आती थी। मशहूर संगीतकार नौशाद ने जब उनकी आवाज सुनी तो वह काफी प्रभावित हुए। उन्होंने सुरैया को फिल्म ‘शारदा’ में गाने का मौका दिया। इस फिल्म में उन्होंने ‘मेरे दिल की सजन समझा दो’ और ‘ये रेल हमारे घर की देखो’ जैसे गाने गाए, जो उस दौरान काफी लोकप्रिय हुए थे।

इसके अलावा, ‘दिल-ए-नादां तुझे हुआ क्या है’, ‘तू मेरा चांद, मैं तेरी चांदनी’, ‘वो पास रहे या दूर’, ‘तारारी तारारी’, ‘ओ दूर जानेवाले’, ‘मन मोर हुआ मतवाला’, ‘धीरे-धीरे आ रे बादल’, ‘चुप-चुप खड़े हो जरूर कोई बात है’, ‘ये ना थी हमारी किस्मत’ जैसे गानों में अपनी आवाज दी।

उन्होंने ”अनमोल घड़ी’, ‘प्यार की जीत’, ‘विद्या’, ‘दिल्लगी’, ‘बड़ी बहन’, ‘शायर’, ‘दास्तान’, ‘अफसर’, ‘सनम’, ‘दीवाना’, ‘मिर्जा गालिब’ समेत कई अन्य सफल फिल्मों में काम किया। उनकी जोड़ी अभिनेता देव आनंद के साथ बेहद पसंद की गई। दोनों ने कई फिल्मों में साथ काम किया और उनकी प्रेम कहानी भी खूब चर्चा में रही। हालांकि परिवार और धर्म की वजह से दोनों की शादी नहीं हो सकी। यह प्रेम कहानी आज भी हिंदी सिनेमा की सबसे चर्चित अधूरी प्रेम कहानियों में गिनी जाती है।

सुरैया का स्टारडम इतना बड़ा था कि उनके घर के बाहर फैंस की भीड़ लगी रहती थी। लोग उनकी एक झलक पाने के लिए घंटों इंतजार करते थे। वह उस दौर की सबसे ज्यादा फीस लेने वाली अभिनेत्रियों में शामिल थीं। कहा जाता है कि कई बड़े अभिनेता भी उनके साथ काम करने की इच्छा रखते थे। उनकी लोकप्रियता सिर्फ भारत तक सीमित नहीं थी, बल्कि विदेशों में भी उनके फैंस मौजूद थे।

करीब चार दशकों तक मनोरंजन जगत से जुड़े रहने के बाद सुरैया ने धीरे-धीरे फिल्मों से दूरी बना ली। उन्होंने कभी शादी नहीं की और अपना जीवन सादगी से बिताया। बढ़ती उम्र के साथ उनकी तबीयत भी खराब रहने लगी। आखिरकार 31 जनवरी 2004 को 74 वर्ष की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।

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