उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वैश्विक छवि, समाजवादी पार्टी में संभावित टूट, भ्रष्टाचार के आरोपों और आगामी राजनीतिक घटनाक्रमों को लेकर कई बड़े दावे किए हैं। गुरुवार को समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी विश्व स्तर पर शांति, सहयोग और व्यापारिक साझेदारी का संदेश देने वाले नेता हैं, जबकि समाजवादी पार्टी के भविष्य को लेकर भी उन्होंने तीखी टिप्पणी की।
ओमप्रकाश राजभर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी लोकप्रियता की सराहना करते हुए कहा कि दुनिया के 32 देशों द्वारा उन्हें सम्मानित किया जाना उनकी वैश्विक स्वीकार्यता और नेतृत्व क्षमता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जहां भी जाते हैं, वहां शांति, सहयोग और विकास का संदेश लेकर जाते हैं। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी का मानना है कि देशों के बीच आपसी व्यापार और सहयोग बढ़ना चाहिए। यदि किसी देश में ऐसी वस्तु का उत्पादन होता है जिसकी भारत को आवश्यकता है, तो उसका आदान-प्रदान होना चाहिए और भारत में बनने वाली आवश्यक वस्तुएं दूसरे देशों को उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि युद्ध किसी भी देश के विकास में बाधा बनता है, इसलिए वैश्विक स्तर पर सहयोग और सौहार्द का वातावरण बनाना जरूरी है।
समाजवादी पार्टी में संभावित टूट की चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए राजभर ने उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के उस दावे का समर्थन किया, जिसमें उन्होंने सपा के कई सांसदों के पाला बदलने की संभावना जताई थी। राजभर ने आरोप लगाया कि विभिन्न मामलों और कथित घोटालों की जांच तेज होने के बाद समाजवादी पार्टी के नेताओं में बेचैनी बढ़ गई है। गोमती खनन घोटाले और गोमती रिवर फ्रंट परियोजना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इन मामलों में जांच आगे बढ़ने से पार्टी के भीतर असहजता का माहौल है। राजभर ने यह भी दावा किया कि सपा के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को उन नेताओं की सूची सौंपी है, जो भविष्य में पार्टी छोड़ सकते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि 27 का चुनाव तो छोड़ दीजिए, सदन शुरू होने से पहले ही खेल हो जाएगा। बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिलेगा। साथ ही, उन्होंने दावा किया कि 2047 तक समाजवादी पार्टी सत्ता में नहीं आने वाली है, यह लिख लीजिए।
अखिलेश यादव द्वारा प्रदेश सरकार पर ट्रांसफर-पोस्टिंग में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जाने पर राजभर ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ट्रांसफर और पोस्टिंग का कार्य अधिकारियों के स्तर पर होता है, न कि मंत्रियों के स्तर पर। राजभर ने कहा कि जो लोग आरोप लगा रहे हैं, उन्हें पहले अपनी आर्थिक स्थिति और संपत्ति का स्रोत स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर कथित खनन घोटाला, लैपटॉप घोटाला और गोमती रिवर फ्रंट मामले में कोई अनियमितता नहीं हुई, तो हजारों करोड़ रुपए की संपत्ति कहां से आई। उन्होंने यह भी पूछा कि विशेष चार्टर विमानों से यात्रा करने के लिए धन का स्रोत क्या है।
राम मंदिर चंदा चोरी मामले की जांच से जुड़े सवाल पर राजभर ने कहा कि जो लोग उन पर सवाल उठाते हैं, उन्हें पहले अपने समाज में हुई घटनाओं पर जवाब देना चाहिए। उन्होंने मऊ और बाराबंकी में हुई घटनाओं का जिक्र करते हुए समाजवादी पार्टी समर्थकों पर गंभीर आरोप लगाए। राजभर ने दावा किया कि मऊ में राजभर समाज के एक व्यक्ति की हत्या कर दी गई थी और बाराबंकी में भी इसी प्रकार की घटना हुई थी। उन्होंने प्रयागराज की एक घटना का भी उल्लेख किया और कहा कि जिन लोगों पर गंभीर आरोप लगे हैं, उन पर भी विपक्ष को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वह अपने बयानों पर पूरी मजबूती से कायम हैं।
परिसीमन और संविधान संशोधन को लेकर पूछे गए सवाल पर राजभर ने विश्वास जताया कि आगामी मानसून सत्र में केंद्र सरकार जो भी विधेयक लाएगी, वह संसद से पारित हो जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार के पास पर्याप्त समर्थन है और जनता भी विकास से जुड़े फैसलों के साथ खड़ी है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर टिप्पणी करते हुए ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि विदेशों में जाकर भारत की संवैधानिक संस्थाओं और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल उठाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि विपक्षी नेताओं को चुनाव आयोग पर भरोसा नहीं है, तो उन्हें अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए।


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